बैंक लूट व राहजनी कर हो जाता है भूमिगत

Published at :31 Jan 2017 5:03 AM (IST)
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बैंक लूट व राहजनी कर हो जाता है भूमिगत

फरार शातिर केशव के घर की हो चुकी है कुर्की-जब्ती लंबे समय से जिला पुलिस कर रही केशव को तलाश रुपयों के साथ लुटेरे हो गये थे गिरफ्तार लाखों रुपये गबन में भी आरोपित थे हरिशंकर सीतामढ़ी : सूबे के विभिन्न जिलों में डाकपाल के रूप में कार्यरत रहे हरिशंकर प्रसाद की कार्यशैली से विभागीय […]

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फरार शातिर केशव के घर की हो चुकी है कुर्की-जब्ती

लंबे समय से जिला पुलिस कर रही केशव को तलाश
रुपयों के साथ लुटेरे हो गये थे गिरफ्तार
लाखों रुपये गबन में भी आरोपित थे हरिशंकर
सीतामढ़ी : सूबे के विभिन्न जिलों में डाकपाल के रूप में कार्यरत रहे हरिशंकर प्रसाद की कार्यशैली से विभागीय अधिकारी भी परेशान रहे है. यहां तक कि उनसे उनके बच्चे भी खुश नहीं है.
विभाग के स्तर से श्री प्रसाद के खिलाफ बार-बार कार्रवाई की गयी, पर वे अपनी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं ला सके. निलंबन की कार्रवाई की गयी और बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी. अन्य तरह की कार्रवाइयों के बावजूद उक्त डाकपाल की लापरवाहपूर्ण कार्यशैली ज्यों की त्यों बनी रही. उनके कारनामों की फेहरिस्त में सरकारी राशि के गबन का मामला भी शामिल है.
क्या है गबन का मामला : 28 अप्रैल 204 से चार अगस्त 2007 तक श्री प्रसाद उपडाकपाल के रूप में नवादा कचहरी डाकघर में कार्यरत थे. 18 अगस्त 07 को उन्हें निलंबित किया गया था. 18 दिसंबर 06 से नौ अगस्त 07 तक उसी डाकघर में डाक सहायक के रूप में अजय कुमार कार्यरत थे. इसी डाकघर से दोनों ने मिलकर लाखों रुपये का गबन कर लिया था. इसका पता तब चला जब सहायक श्री कुमार 32 दिनों की छुट्टी पर गये और उनका प्रभार ग्रहण करने के लिए वहां अंबिका चौधरी गये. लेखा-बही व अन्य कागजातों का मिलान करने के बाद श्री चौधरी ने पाया कि करीब तीन लाख रुपये का गबन कर लिया गया है.
उनकी सूचना पर डाक अधीक्षक द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित कर दिया गया. वहीं, सहायक डाक अधीक्षक, नवादा द्वारा गबन की बाबत नवादा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. जांच में पाया गया था कि डाकघर समरी, उपडाकघर दैनिक लेखा व लेखा-खाता में डाकघरों का कुल बैलेंस बढाकर दिखाया गया है, जबकि डाकघर के रोकड़ जमा में उतनी हीं राशि घटाकर दिखाया गया है. सहायक डाक अधीक्षक ने पुलिस को बताया था कि सरकारी राशि का गबन करने के लिए जो तरकीब श्री प्रसाद ने अपनायी थी, उसी तरकीब का उपयोग सहायक अजय कुमार ने किया था. बता दें कि उपडाकपाल श्री प्रसाद शहर के हीं लक्ष्मीनगर के रहने वाले है. उनकी कार्यशैली से आहत उनका पुत्र अब उन्हें धीरे-धीरे कर बेनकाब कर रहा है.
डाककर्मी हरिशंकर प्रसाद की कार्यशैली से विभाग परेशान
गंभीर आरोपों के चलते निलंबन की भी हुई थी कार्रवाई
गबन को ले नवादा थाना में करायी गयी थी प्राथमिकी
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