फिर गूंजेगी चरखे की आवाज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Jan 2017 4:55 AM (IST)
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सीतामढ़ी : जिला खादी ग्रामोद्योग का जल्द ही पुनरूद्धार होने वाला है. केंद्र सरकार की ओर से केआरडीपी यानी खादी पुनरूद्धार योजना के तहत खादी ग्रामोद्योग संघ के राज्य कार्यालय को एक करोड़ 19 लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. संघ के मंत्री रामबलम राय ने बताया कि केआरडीपी योजना के तहत जिला खादी ग्रामोद्योग […]
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सीतामढ़ी : जिला खादी ग्रामोद्योग का जल्द ही पुनरूद्धार होने वाला है. केंद्र सरकार की ओर से केआरडीपी यानी खादी पुनरूद्धार योजना के तहत खादी ग्रामोद्योग संघ के राज्य कार्यालय को एक करोड़ 19 लाख रुपये आवंटित किये गये हैं.
संघ के मंत्री रामबलम राय ने बताया कि केआरडीपी योजना के तहत जिला खादी ग्रामोद्योग संघ का कायाकल्प होने वाला है. संस्था अब पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से चलेगा. कंप्यूटर से लैश कार्यालय होगा. उन केंद्रों पर फिर से चरखे चलेंगे, जिन केंद्रों पर कभी चरखे की मनमोहक आवाज गुंजा करती थी. गांव की गरीब महिलाओं को फिर से रोजगार मिलेगा. आधुनिक चरखे होंगे.
सूतकारों की आमदनी पहले से दो गुनी से भी अधिक होगी, क्योंकि आधुनिक चरखे लगेंगे, जिसके माध्यम से उत्पादन अधिक होगी. मजदूरी दर भी अधिक होगा. जाहिर है कि गांव की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए खादी ग्रामोद्योग का कायाकल्प किसी वरदान से कम नहीं होगा.
साकार होगा गांधी का सपना
श्री राय ने बताया कि गांधी जी का भी यही सपना था कि गांव में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर महिला व पुरुषों को खादी के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाये. बताया कि सीतामढ़ी व शिवहर को मिलाकर कुल 18 केंद्र व उपकेंद्र है. आवंटित राशि से एक भवन का निर्माण कराना है. शेष राशि चरखा व कच्चा माल समेत अन्य संसाधनों पर खर्च करना है. जिले के 8 केंद्रों पर 8 स्पिंडल वाला आधुनिक चरखा उपलब्ध कराना है.
इन केंद्रों पर चलेंगे चरखे
जिले के बैरगनिया, पुपरी, माधोपुर (मझौलिया), खड़का, सुतिहारा, रीगा, उत्पत्ती केंद्र, सीतामढ़ी व शिवहर खादी ग्रामोद्योग केंद्र फिर से चालू होंगे. इन केंद्रों पर फिर से चरखे चलेंगे और इस क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को फिर से रोजगार मिलेगा. उक्त केंद्र फिर से अपने दशकों पुराने वाले रंग में दिखेंगे.
30 प्रतिशत तक बढ़ी बिक्री
जिला खादी ग्रामोद्योग संघ के विभिन्न केंद्रों पर खादी सूती, उलन व सिल्क समेत अन्य वस्त्रों के अलावा मशाला, अगरबत्ती व मधु समेत अन्य सामग्री की बिक्री होती है.
जाड़ा का मौसम होने के कारण वर्तमान में उलन की अच्दी बिक्री चल रही है. मंत्री श्री राय ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल खादी के विभिन्न उत्पादों को मिलाकर करीब 30 फीसदी बिक्री बढ़ी है. जाहिर है, खादी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है.
खादी ग्रामोद्योग का होगा पुनरुद्धार
चरखे की धुन से निकलेगी समृद्धी की तान
खादी ग्रामोद्योग के विकास को मिले 1.19 करोड़
आठ केंद्रों पर फिर से चलेंगे चरखे, वह भी आधुनिक
खादी के सभी केंद्र डिजिटल सिस्टम से होंगे लैश
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