काला झंडा के साथ गौर में निकला विरोध रैली

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काला झंडा के साथ गौर में निकला विरोध रैली फोटो-19 सड़क पर प्रदर्शन करते लोग, 20 बॉर्डर पर नाकेबंदी करते मधेशी, 21 बैठक में शामिल लोगनेपाल में मधेस आंदोलन 121 वें दिन भी जारीपीएम ओली के खिलाफ जमकर की नारेबाजीबैरगनिया. सीमावर्ती नेपाल के गौर में मधेस आंदोलन सोमवार को 121 वें दिन भी जारी रहा. […]

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काला झंडा के साथ गौर में निकला विरोध रैली फोटो-19 सड़क पर प्रदर्शन करते लोग, 20 बॉर्डर पर नाकेबंदी करते मधेशी, 21 बैठक में शामिल लोगनेपाल में मधेस आंदोलन 121 वें दिन भी जारीपीएम ओली के खिलाफ जमकर की नारेबाजीबैरगनिया. सीमावर्ती नेपाल के गौर में मधेस आंदोलन सोमवार को 121 वें दिन भी जारी रहा. संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोरचा के औरइया एवं पचरुखी गाविस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विशाल विरोध रैली निकाला. गौर मधेस क्रांति चौक से निकला जुलूस काला झंडा व सिंघा बाजा के साथ गौर-बैरगनिया रोड स्थित मैत्री पुल पहुंचा, जहां मोरचा कार्यकर्ताओं ने धरना व नाकेबंदी किया. जुलूस में शामिल लोग पीएम ओली जिंदाबाद, पुलिस दमन बंद करो, हमारी मांगे पूरी करो, मधेसी एकता जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. जुलूस गौर के मुख्य पथ होकर गुजरा, जिसमें रामानंद प्रसाद सिन्हा, शैलेंद्र सिंह, राम वचन साह, शोभा साह, बच्चू नारायण चौबे, राधेश्याम गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद यादव समेत हजारों लोग शामिल थे. अधिकारी व कर्मी को कालिख पोतने की चेतावनी उधर मधेसी शिक्षक फोरम के जिला कार्यालय में संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोरचा की बैठक जिला संयोजक राम निवास यादव की अध्यक्षता में हुई. बैठक में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया. वहीं सरकारी कार्यालयों में उपस्थित होनेवाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को कालिख पोतने की चेतावनी भी दी गयी. कहा गया कि मोरचा के सभी कार्यकर्ता रौतहट जिला मुख्यालय गौर स्थित सरकारी कार्यालयों के पास तैनात रहेंगे. संविधान समावेशी व सर्वोत्कृष्ट : शाक्य दूसरी ओर पूर्व उद्योग मंत्री सह नेकपा एमाले के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अष्ट लक्ष्मी शाक्य ने जिले के चंद्रनिगाहपुर में महिला हिंसा के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि नेपाल का नया संविधान समावेशी तथा सर्वोत्कृष्ट है. यदि संविधान से असंतुष्टि है तो इसके लिए वार्ता व संशोधन के माध्यम से ही इसे पूरा किया जा सकता है. उन्होंने असंतुष्ट गुट से आग्रह किया कि पहले संविधान के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें, उसके बाद वार्ता व संशोधन के संबंध में विचार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अधिकांश दलों के बहुमत को विश्वास में लेकर संविधान बना है. आंदोलन समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने मधेसी मोरचा से नाकेबंदी समाप्त करने का आग्रह किया.

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