जनता ने नये चेहरों को दिया मुखिया बनने का मौका
Updated at : 09 Jun 2016 5:57 AM (IST)
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में निवर्तमान मुखियाओं का बुरा हाल हुआ है. आरक्षण के चलते एक तो कई निवर्तमान मुखिया चुनाव नहीं लड़े और जो चुनाव मैदान में उतरे भी तो उनमें से अधिकांश को जनता ने पसंद नहीं किया. यानी निवर्तमान मुखिया चुनाव हार गये. अब वे चुनाव के हारने के कारणों की समीक्षा में […]
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में निवर्तमान मुखियाओं का बुरा हाल हुआ है. आरक्षण के चलते एक तो कई निवर्तमान मुखिया चुनाव नहीं लड़े और जो चुनाव मैदान में उतरे भी तो उनमें से अधिकांश को जनता ने पसंद नहीं किया. यानी निवर्तमान मुखिया चुनाव हार गये. अब वे चुनाव के हारने के कारणों की समीक्षा में लगे हुए हैं. प्रभात खबर ने तीन प्रखंडों के बाद बुधवार को रीगा व बैरगनिया प्रखंड का जायजा लिया.
मात्र एक पूर्व मुखिया जीते
बैरगिनया : प्रखंड में कुल आठ पंचायत है. इस बार का मुखिया पद का चुनाव परिणाम रोचक व चौंकाने वाला रहा है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र एक पूर्व मुखिया को चुनाव में सफलता मिल सकी.
शेष सात पंचायतों से नये चेहरे को मुखिया बनने का मौका मिला है. मूसाचक पंचायत से मुखिया पद पर निवर्तमान मुखिया विजय कुमार व पूर्व मुखिया दीनबंधु प्रसाद दोनों चुनाव हार गये. इसी तरह परसौनी पंचायत से पूर्व मुखिया द्वय शिवजी महतो व समसुल कमर खां को भी मात खानी पड़ी.
अब पति मुखिया बने: अख्ता पश्चिमी चकवा से कमर सुल्ताना निवर्तमान मुखिया हैं. इस बार के चुनाव में उनके पति शमीम खां मुखिया पद के लिए चुनाव मैंदान में उतरे और जीत भी गये. वे पूर्व में भी मुखिया रह चुके हैं. सात पंचायतों में नये चेहरे पहली बार मुखिया बने हैं. इनमें क्रमश: मुसाचक से गणेश यादव, नंदवारा से निर्मला देवी, पचटकी चदु से हरदेव नारायण साह, बेलगंज से हसीना देवी, परसौनी से दिनेश प्रसाद, पताहीं से चिंतामन राम व जमुआ से इंदु देवी शामिल है. तीन पंचायतों से महिला को मुखिया बनने का मौका मिला है.
सगे- संबंधी भी हार गये: बेलगंज, नंदवारा व जमुआ मुखिया का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये जाने के कारण नंदवारा के पूर्व मुखिया लक्ष्मी सिंह, बेलगंज के सोनू झा, नागेंद्र झा व जमुआ के पूर्व मुखिया मो हासीम के अलावा पचटकी यदु की मुखिया मीना देवी ने अपने सगे-संबंधियों को चुनाव मैदान में उतारा था, पर कोई लाभ नहीं मिला. यानी जनता ने नये लोगों को पसंद किया.
… और दूसरी पंचायत की मुखिया बनी : रीगा़ प्रखंड क्षेत्र की 16 में से 13 पंचायतों के मुखिया पद का रिजल्ट आ चुका है. कई दिग्गज लोगों को हार का सामना करना पड़ा है. रीगा द्वितीय पंचायत से मुखिया पद पर चंचला देवी निर्वाचित हुई है. उस पंचायत के लिए नया चेहरा हैं.
खास बात यह कि वह उक्त पंचायत की निवासी नहीं है. बावजूद चुनाव जीत जाना एक बड़ी बात कही जा रही है. चंचला देवी का घर रीगा प्रथम पंचायत में है. बता दें कि चंचला वर्ष 2006 से 11 तक रीगा प्रथम पंचायत की मुखिया थी.
पूर्व व निवर्तमान हारे : पोशुआ पटनिया पंचायत से मुखिया पद पर निवर्तमान मुखिया धूरा देवी व पूर्व मुखिया विजेंद्र प्रसाद यादव दोनों हार गये. इस बार सीमा देवी को मुखिया बनने का मौका मिला है. रीगा प्रथम से निवर्तमान मुखिया चुनाव नहीं लड़ी. वहां से सुनीता देवी जीती. बभनगामा से निवर्तमान मुखिया मणिभूषण राय खुद के बजाय पत्नी अनीता देवी को चुनाव मैदान में उतारे थे.
सफलता नहीं मिली. वहां से पूर्व मुखिया कामेशनंदन सिंह की पत्नी आशा सिंह को जीत मिली है. बुलाकीपुर से निवर्तमान मुखिया पवन साह चुनाव नहीं लड़े. अनुसूचित जाति के लिये पद आरक्षित हो गया था. नये चेहरे के रूप में वीरेंद्र दास विजयी रहे.
रामजी का नहीं चला जादू : रेवासी पंचायत से निवर्तमान मुखिया ललिता देवी चुनाव नहीं लड़ी. उनके पति व पूर्व मुखिया रामजी मंडल चुनाव मैंदान में उतरे थे. यह जान कर हैरानी होगी कि 2001 से 2016 तक लगातार मुखिया रहे पति-पत्नी को इस बार के चुनाव में करारी शिकस्त मिली है.
श्री मंडल चौथे नंबर पर रहे. वहां की जनता ने अनिल मंडल को मुखिया चुना है. भगवानपुर से निवर्तमान मुखिया रामविनय साह चुनाव नहीं लड़े. मीरा देवी मुखिया बनी है जो नयी है. अन्हारी से भी नये चेहरे के रूप में भिखारी साह मुखिया पद पर जीते हैं. निवर्तमान मुखिया नूरजहां अंसारी चुनाव नहीं लड़ी थी.
मां को बनाया मुखिया
कुसमारी पंचायत से निवर्तमान मुखिया मनोरमा प्रसाद अपने पुत्र पंकज आनंद को चुनाव लड़ाया था. चुनाव हार गये. प्रेम कुमार मुखिया बने हैं. श्री कुमार को पहली बार यह मौका मिला है. सिराहीं से निवर्तमान मुखिया विजय यादव खुद के बजाय मां रामसोमारी देवी को चुनाव मैंदान में उतारा और जनता के सहयोग से मां को मुखिया बना दिये. पूर्व मुखिया ब्रजेंद्र सिंह की पत्नी मीना देवी को मात खानी पड़ी. मेहसिया से निवर्तमान मुखिया गणेश यादव को दुबारा मुखिया बनने का मौका मिला है. पकड़ी मठवा से निवर्तमान मुखिया चुनाव नहीं लड़ी. नये चेहरे के रूप में मुकेंद्र ठाकुर मुखिया बने हैं.
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