निगरानी की गिरफ्त में एफओ तो कैसे होगा वित्तीय कार्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 May 2015 8:24 AM (IST)
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छपरा (नगर) : जेपी विवि में करोड़ों रुपये की सादी उत्तर पुस्तिका खरीद मामले के सामने आने के बाद विवि के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी तथा पदाधिकारियों के हटाने व बनाने की प्रक्रिया में विवि की व्यवस्था बेपटरी होती नजर आ रही है. वर्तमान स्थिति के मद्देनजर विवि प्रशासन को सबसे बड़ी परेशानी विवि के विभिन्न […]
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छपरा (नगर) : जेपी विवि में करोड़ों रुपये की सादी उत्तर पुस्तिका खरीद मामले के सामने आने के बाद विवि के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी तथा पदाधिकारियों के हटाने व बनाने की प्रक्रिया में विवि की व्यवस्था बेपटरी होती नजर आ रही है.
वर्तमान स्थिति के मद्देनजर विवि प्रशासन को सबसे बड़ी परेशानी विवि के विभिन्न बैंक खाता के संचालन में उठानी पड़ सकती है. विवि के खाते का संचालन एफओ व कुलसचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होता है. इस दौरान इनमें से कोई एक पदाधिकारी किसी कारणवश हटाये जाते हैं या पद छोड़ते हैं, तो दूसरे पदाधिकारी हटाये गये पदाधिकारी के स्थान पर नियुक्त नये पदाधिकारी के हस्ताक्षर को सत्यापित कर बैंक को भेजता है. इसके बाद बैंक उन्हें खाता संचालन का अधिकार दे देता है.
हालांकि वर्तमान स्थिति यह है कि विवि के एफओ सोनेलाल सहनी निगरानी की गिरफ्त हैं, तो तत्कालीन कुलसचिव को हटा कर डॉ आरपी बबलू को कुलसचिव बना दिया गया है. अब सवाल उठता है कि यदि एफओ के पद पर नया व्यक्ति योगदान कर भी लेता है, तो इन दोनों पदाधिकारियों के हस्ताक्षर को सत्यापित कौन करेगा. कमोबेश यही स्थिति परीक्षा विभाग से संबंधित खाता संचालन पर भी हो सकती है.
परीक्षा विभाग से संबंधित खाते का संचालन विवि के कुलसचिव, एफओ तथा परीक्षा नियंत्रक के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है. हालांकि इनमें से कोई दो व्यक्ति भी खाते का संचालन कर सकता है.
लेकिन बदली हुई स्थिति में यहां भी नये पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के सैंपल को सत्यापित करने में समस्या होगी. क्योंकि वर्तमान में तीनों पदाधिकारी बदल दिये गये हैं, तो आखिर इनके हस्ताक्षर को कौन सत्यापित करेगा.
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