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Samastipur News:पीजी में नामांकन : सीटों की संख्या का पता नहीं, छात्रों में संशय

Updated at : 14 Sep 2025 7:02 PM (IST)
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Samastipur News:पीजी में नामांकन : सीटों की संख्या का पता नहीं, छात्रों में संशय

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने जिले के चिन्हित कुछेक अंगीभूत कॉलेजों में सीमित विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दिए सोलह दिन बीत चुके है

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Samastipur News:समस्तीपुर : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने जिले के चिन्हित कुछेक अंगीभूत कॉलेजों में सीमित विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दिए सोलह दिन बीत चुके है लेकिन अभी तक विषयवार कितने सीटों पर नामांकन लिया जायेगा यह साफ नहीं किया है. इस वजह से काॅलेज प्रशासन व छात्र छात्राओं में संशय की स्थिति कायम है. कुछ काॅलेजों का कहना है कि पीजी की पढ़ाई पहली बार शुरू की जानी है लेकिन किसी प्रकार का गाइडलाइन भी नहीं दिया जा रहा है. विदित हो कि विगत माह के अंतिम सप्ताह में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पत्राचार कर बताया था कि शहर के वीमेंस कॉलेज में अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, हिन्दी, इतिहास, गृहविज्ञान, संगीत, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र जैसे विषयों की पढ़ाई होगी. ताजपुर के डॉ. एलकेबीडी कॉलेज में हिन्दी और अर्थशास्त्र, बीआरबी कॉलेज में इतिहास, हिन्दी और अर्थशास्त्र जबकि आरएनएआर कॉलेज में हिन्दी और राजनीति शास्त्र की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी गई है. फिलहाल कॉलेज से प्रस्ताव प्राप्त होने पर दो से तीन विषयों (प्रायोगिक विषय को छोड़कर) में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी गई है. किसी विषय में पीजी की पढ़ाई शुरू करने के लिए उस विषय में दो नियमित शिक्षकों का कॉलेज में उपलब्ध होना अनिवार्य था. छात्र नेता मुलायम सिंह यादव ने बताया कि विवि प्रशासन अविलंब छात्रहित में विषयवार सीटों की संख्या निर्धारित कर पारदर्शिता बरते अन्यथा मामला राजभवन तक जायेगा. विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उन्नयन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाना जरूरी हैं, ताकि छात्रों को और अधिक अवसर मिल सके. इसके लिए पीजी के साथ-साथ डिग्री स्तर पर भी सीट वृद्धि की जरूरत है. साथ ही काॅलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर में वृध्दि की भी आवश्यकता है. स्नातक उत्तीर्ण छात्रों के लिए सबसे बड़ी परेशानी पीजी में नामांकन को लेकर हो रही है. क्योंकि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से संचालित जिले के सभी अंगभूत और मान्यता प्राप्त कॉलेजों में प्रतिवर्ष करीब 60 हजार से ज्यादा छात्र उत्तीर्ण होते हैं. हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्नातक उत्तीर्ण होते हैं. लेकिन काफी कम संख्या में पीजी में छात्रों का नामांकन हो पाता है. इसका कारण यह है कि पीजी में यहां जिन विषयों की पढ़ाई होती है, उनमें काफी कम सीटें हैं. सीट वृद्धि के लिए छात्र संगठनों की ओर से वर्षों से मांग की जा रही है. इसके बावजूद अब तक पीजी में सीटों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है. लिहाजा बड़ी संख्या में आवेदन करने वाले छात्र पीजी में नामांकन नहीं ले पाते हैं. इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है. छात्र संगठनों के द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने पर विवि की ओर से सीट वृद्धि संबंधी पत्र राज्य सरकार को भेज दिया जाता है. लेकिन उस पर क्या अमल हो रहा है, इसकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है. विदित हो कि विश्वविद्यालय के सीनेट और सिंडिकेट में कई सांसद, एमएलसी, एमएलए, मंत्री सदस्य के रूप में हैं. इसके बावजूद छात्रों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. विश्वविद्यालय में सीट बढ़ाने के साथ ही बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए जनप्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय प्रशासन को आगे आना होगा.जिले के तीन कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई होती है जिसमें मात्र एक समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में 11 विषयों में, बीआरबी कॉलेज और आरबी कॉलेज दलसिंहसराय में मात्र पांच व चार विषयों से पीजी की पढ़ाई होती है. आरबी कॉलेज दलसिंहसराय में चार अन्य विषयों एवं एएनडी कॉलेज पटोरी में चार विषयों से पीजी की पढ़ाई की मूलभूत सुविधा की जांच और स्वीकृति के बावजूद इस वर्ष पीजी की पढ़ाई की स्वीकृति नहीं मिल पाई है. जिससे छात्रों और बुद्धिजीवियों में आक्रोश व्याप्त है. समस्तीपुर काॅलेज समस्तीपुर में 1080 सीटें, बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर में 500 व आरबी काॅलेज दलसिंहसराय में मात्र 480 सीट यानी कुल 2060 सीटों पर पीजी की पढ़ाई पर होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ABHAY KUMAR

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