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थाने की दहलीज पर अब डर नहीं, भरोसा लेकर पहुंच रहीं महिलाएं

Updated at : 21 Feb 2026 6:13 PM (IST)
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थाने की दहलीज पर अब डर नहीं, भरोसा लेकर पहुंच रहीं महिलाएं

थाने की दहलीज पर अब डर नहीं, भरोसा लेकर पहुंच रहीं महिलाएं

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सलखुआ में महिला हेल्प डेस्क का दिख रहा असर सलखुआ. कभी थाने की चौखट पार करने से हिचकने वाली महिलाएं आज उसी परिसर में बने महिला हेल्प डेस्क पर खुलकर अपनी पीड़ा बयान कर रही हैं. सलखुआ थाना में स्थापित महिला हेल्प डेस्क अब न सिर्फ शिकायत दर्ज करने का केंद्र है, बल्कि महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और संवेदनशील संवाद स्थल बन चुका है. विश्वास की नई शुरुआत महिला हेल्प डेस्क की सक्रियता के बाद माहौल में स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है. डेस्क प्रभारी एसआई स्वीटी कुमारी बताती हैं कि महिलाएं अब बिना झिझक अपनी बात रख रही हैं. घरेलू कलह, मानसिक प्रताड़ना या मारपीट जैसी समस्याओं को लेकर पीड़िताएं सीधे हेल्प डेस्क पर पहुंचती हैं, जहां उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी जाती है. शिफ्ट के अनुसार महिला सिपाही सहित अन्य कर्मी तैनात रहते हैं, जो पीड़िताओं को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. घरेलू विवादों के मामले अधिक हेल्प डेस्क पर आने वाले मामलों में घरेलू हिंसा, पति-पत्नी के बीच विवाद, ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना और पारिवारिक तनाव प्रमुख हैं. प्रत्येक आवेदन पर दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई जाती है, तथ्यों की जांच होती है और स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जाती है। पहले समझाैते, फिर कानूनी कार्रवाई अधिकांश मामलों में आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है, ताकि परिवार टूटने से बच सके. कई मामलों में सुलह-समझौते के जरिए विवाद समाप्त भी हुए हैं. लेकिन जहां मामला गंभीर होता है या समझौता संभव नहीं होता, वहां कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाती है. आंकड़ों में दिखी सक्रियता एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक महिला हेल्प डेस्क पर 346 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें 60 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गयी, जबकि 100 से अधिक मामलों में धारा 107 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गयी. शेष मामलों का समाधान आपसी सुलह से किया गया. सुरक्षा के साथ संवेदना महिला हेल्प डेस्क ने यह साबित किया है कि पुलिस की भूमिका केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदनशील और भरोसे का वातावरण तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सलखुआ थाना की यह पहल महिलाओं को न्याय के साथ आत्मविश्वास भी दे रही है.

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Dipankar Shriwastaw

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By Dipankar Shriwastaw

Dipankar Shriwastaw is a contributor at Prabhat Khabar.

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