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क्या आप जानते हैं देश में कितने आईएएस 5 साल में चुने गए और बिहार के कितने ललना डीएम हुए?

Updated at : 19 Feb 2026 3:25 PM (IST)
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संघ लोक सेवा आयोग

IAS Officers in India : क्या आप जानते हैं कि पिछले 5 सालों में देश में कितने आईएएस बने और किस राज्य से सबसे अधिक आईएएस बने?भारतीय प्रशासनिक सेवा जिसे भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवा माना जाता है और इस परीक्षा में पास होने वालों को आम लोगों की भाषा में यह कहा जाता है कि वह आईएएस या डीएम हो गया है.

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IAS Officers in India : भारत में आईएएस अधिकारी का पद सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है. आईएएस अधिकारी एक तरह से एक जिले का प्रमुख होता है. यही वजह है कि इस पद और इसकी परीक्षा को लेकर देश भर के लोगों में अलग ही रोमांच रहता है. प्रतिवर्ष यह परीक्षा तीन चरणों में होती है और हर राज्य के लोग इस परीक्षा को क्रैक करने के लिए इसका हिस्सा बनते हैं. इस प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर हिंदी पट्टी खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और झारखंड के लोगों में उत्साह बहुत अधिक होता है. बिहार में तो बहुसंख्यक लोग अपने बच्चे को आईएएस ही बनाना चाहते हैं. अमूमन लोगों में ऐसी सोच है कि देश में सबसे अधिक आईएएस बिहार से बनते हैं, लेकिन पिछले दिनों संसद में सरकार ने एक डाटा जारी किया, जिसमें राज्यवार यह बताया गया है कि किस राज्य से कितने आईएएस, कितने आईपीएस और कितने आईएफएस बनते हैं, तो आइए जानते हैं क्या है सच…

देश में पिछले 5 साल में कितने आईएएस चुने गए हैं?

राज्यस्वीकृतपदस्थापितप्रतिशत
उत्तराखंड12610986.5%
तमिलनाडु39434387.0%
कर्नाटक31427386.9%
मध्य प्रदेश45939185.2%
बिहार35930384.4%
जिन राज्यों से सबसे अधिक आईएएस हुए

केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया है कि पिछले 5 सालों में (2020–24) देश में कुल 6877 आईएएस, 5099 आईपीएस और 3193 आईएफएस अधिकारियों की जरूरत थी. स्वीकृत पदों के बावजूद देश में कुल 5577 आईएएस, 4594 आईपीएस और 2164 आईएफएस अधिकारी ही पदस्थापित हो पाए. इन आंकड़ों के अनुसार तीनों ही पदों पर स्वीकृत संख्या के अनुसार अधिकारी नियुक्त नहीं हो पाए और पद खाली रह गए.

किस राज्य से बनते हैं सबसे ज्यादा आईएएस?

भारत में अमूमन यह धारणा है कि बिहार से सबसे अधिक आईएएस अधिकारी बनते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि राज्यवार स्वीकृत पदों की संख्या ही बिहार में सबसे अधिक नहीं है, तो वहां से सबसे अधिक आईएएस कैसे हो सकते हैं. हां, यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन पांच वर्षों के आंकड़ों में आईपीएस कैडर में बिहार का प्रदर्शन सबसे अच्छा है और आईएएस में तमिलानाडु का प्रदर्शन सबसे अच्छा है.

राज्यस्वीकृतपदस्थापितप्रतिशत
बिहार24224199.6%
गुजरात20820397.6%
राजस्थान22221697.3%
कर्नाटक22420390.6%
महाराष्ट्र32930693.0%
देश में आईपीएस का आंकड़ा

बिहार आईपीएस में टाॅप तो आईएफएस में पीछे क्यों?

सेवाप्रतिशत
IAS84.4% (अच्छा)
IPS99.6% (देश में सर्वश्रेष्ठ)
IFS67.5% (कमजोर)

बिहार के आंकड़ों पर अगर गौर करें, तो पाएंगे कि आईपीएस के लिए कुल स्वीकृत पदों में से इन पांच सालों में मात्र एक ही खाली रहा. कुल स्वीकृत पद थे 242 और पदस्थापित अधिकारी थे 241. आईएसएस अधिकारियों के मामले में यह आंकड़ा 359 और 303 का है, जबकि आईएफएस के मामले में यह संख्या काफी चौंकाने वाली है, वहां यह 74 और 50 का है. प्रतिशत के लिहाज से स्वीकृत और पदस्थापित अधिकारियों की संख्या आईएएस 84.4%, आईपीएस 99.6% और आईएफएस 67.5% है. दरअसल बिहार के लोगों में अपने देश में रहकर कीपोस्ट पर काम करने की प्रवृत्ति ज्यादा है, इसी वजह से वे आईएफएस के कैडर में थोड़ी कम रुचि दिखाते हैं, जबकि आईएएस और आईपीएस में उनकी रुचि बहुत है. झारखंड में आईएएस के लिए कुल स्वीकृत पद 224 हैं और पदस्थापित 177 अधिकारी हैं. आईपीएस कैडर में 158 स्वीकृत और पदस्थापित 143 हैं और आईएफएस के लिए 142 कुल पद और पदस्थापित 84 हैं.

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ओबीसी और एससी–एसटी कैटेगरी के कितने उम्मीदवार चयनित हुए?

संसद में बताए गए आंकड़ों के अनुसार आईएएस की परीक्षा में ओबीसी के 245, एससी के 135 और एसटी कैटेगरी के 67 उम्मीदवार चुने गए हैं. जबकि आईपीएस में 255 ओबीसी, 141 एसएसी और 71 एसटी कैंडिडेट चुने गए हैं. आईएफएस कैडर में 231 ओबीसी, 95 एससी और 48 एसटी उम्मीदवार चुने गए हैं.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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