क्या केरला स्टोरी 2 के रिलीज होने से समाज में हिंदू–मुस्लिम के बीच नफरत भड़केगी, क्या है मंशा?

Edited by Rajneesh Anand
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केरला स्टोरी 2

The Kerala Story 2 : क्या 27 फरवरी को केरला स्टोरी 2 रिलीज हो पाएगी? यह सवाल इसलिए क्योंकि इस मूवी के रिलीज को रोकने के लिए केरला हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई है और कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है. फिल्म पर आरोप है कि यह गलत नरेटिव सेट कर रही है और समाज में नफरत फैला रही है, जबकि फिल्म के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह का कहना है कि यह समाज की एक सच्चाई है, जिसे मैंने दिखाने की कोशिश की है और समाज में जो षडयंत्र चल रहा है उससे लड़कियों को आगाह किया है, वे इस सच्चाई को जानना चाहती हैं और सजग रहना चाहती हैं या नहीं यह उनकी मर्जी है, लेकिन सच को देखकर आंख बंद नहीं किया जा सकता है.

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The Kerala Story 2 : केरला स्टोरी 2 का ट्रेलर हाल ही में जारी हुआ है और जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस मूवी की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रोपेगैंडा बताया है. उनका कहना है कि इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सांप्रदायिक सोच को बढ़ाने और समाज में नफरत फैलाने के लिए यह फिल्म लाई जा रही है.

दूसरी ओर बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी की बात होती है, लेकिन जब समाज के किसी कट्टरवादी सोच का सच सामने लाया जाता है, तो कांग्रेस उसका विरोध करने लगती है.यह गलत है, समाज में अगर बुराइयां हैं, तो उसे छिपाने की जरूरत क्या है. कैथोलिक चर्च कई बार लव जिहाद की बात कर चुका है. कांग्रेस महिलाओं की प्रताड़ना पर आधारित फिल्म का विरोध कर रही है. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने फिल्म को प्रोपेगैंडा बताया है और कहा है कि हमारा समाज ऐसा नहीं है. कुछ लड़कियों के साथ ऐसा हुआ है, लेकिन देशभर में 30-35 घटनाओं से पूरे देश का आकलन सही नहीं है. हमारे यहां सभी धर्म के लोगों को साथ रहने की सीख दी जाती है.

केरला स्टोरी 2 को लेकर क्या है विवाद?

आपको याद होगा कि 2023 में दि केरला स्टोरी रिलीज हुई थी. इस मूवी के रिलीज होने  के बाद भी काफी विवाद हुआ था. इस फिल्म के बारे में यह दावा किया गया था कि वह सच्ची घटनाओं पर आधारित थी और फिल्म में लव जिहाद का मामला दिखाया गया था. उसमें यह भी बताया गया था कि कैसे हिंदू लड़कियों को आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट में शामिल कर उनका शोषण किया जाता है.  

अब केरला स्टोरी 2 रिलीज होने वाली है. यह मूवी 27 फरवरी को रिलीज हो रही है, लेकिन इसके ट्रेलर के आते ही बवाल मच गया है. फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह हैं, जो एक नेशनल अवार्ड विनिंग निर्देशक हैं. फिल्म के बारे में यह दावा किया जा रहा है कि यह सच्ची घटनाओं पर आधारित है. इस फिल्म में लव जिहाद के जरिए लड़कियों को धोखा देने और उन्हें प्रताड़ित करने की बहुत ही इमोशनल दास्तान है. इस फिल्म के समर्थकों का कहना है कि यह सच है और इसे दिखाया जाना चाहिए, जबकि इसके विरोधियों का कहना है कि यह महज समाज में नफरत फैलाने का काम है. यह समाज में हिंदू–मुस्लिम नफरत को बढ़ाने का काम करेगा. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने केरला स्टोरी 2 को समाज में नफरत फैलाने वाला कहा है और कहा है कि इस फिल्म गलत नरेटिव सेट कर रही है और मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश है. यह हिंदू-मुस्लिम एकता पर खतरा है.

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हाईकोर्ट पहुंचा मामला?

केरला स्टोरी 2 का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. श्रीदेव नंबूदरी नाम के एक व्यक्ति ने केरल हाई कोर्ट में केरला स्टोरी 2 के खिलाफ केस दायर किया है और यह बताया है कि इस फिल्म में केरल को जिस तरीके से दिखाया गया है, वह बहुत ही चिंताजनक है. नंबूदरी ने फिल्म के रिलीज को चैलेंज किया है और बताया है कि इसके रिलीज से क्षेत्रीय सद्‌भाव पर असर पड़ सकता है. पिटीशन दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने फिल्म के प्रोड्‌यूसर, इंफार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को नोटिस जारी किया है. कोर्ट इस मामले की सुनवाई 24 फरवरी को करने वाला है.

फिल्म को चेतावनी की तरह दिखाना बना गुस्से की वजह

केरला स्टोरी 2 को एक चेतावनी के अंदाज में दिखाया गया है. ट्रेलर में देश के तीन अलग–अलग हिस्सों की कहानी दिखाई जाती है, जिसमें यह बताया जाता है कि हिंदू लड़कियों को मुसलमान लड़के प्रेमजाल में फंसाकर उनसे शादी करते हैं और फिर उन्हें जबरन मुसलमान बनाया जाता है. फिल्म में कई इमोशनल दृश्य भी है, जो लड़कियों के सपने टूटने जैसा है, मसलन उन्हें रील बनाने से रोकना, जबरदस्ती बीफ खिलाना और मन भर जाने पर उनका दूसरे से रेप करवाना. इस तरह के दृश्य लोगों के मन में आक्रोश भरते हैं. फिल्म के समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष इस तरह के दृश्य से आक्रोशित होता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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