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सुप्रीम कोर्ट ने हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद के खिलाफ दायर याचिका पर सुना दिया फैसला, Video भी देखें

Updated at : 20 Feb 2026 4:02 PM (IST)
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Babri Masjid Case West Bengal Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट.

Babri Masjid Case: अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को जिस बाबरी मस्जिद का ध्वंस हुआ था, वैसा ही बाबरी मस्जिद अब पश्चिम बंगाल में बन रहा है. बाबर के नाम पर बन रही इस बाबरी मस्जिद के नामकरण पर रोक लगाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने क्या कहा, आप भी पढ़ें.

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Babri Masjid Case: हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. शुक्रवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा- यह सुनने के लायक नहीं है.

बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम रखने पर रोक की मांग

याचिकाकर्ता ने मुगल शासक बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने का निर्देश देने की अपील देश की सबसे बड़ी अदालत से की थी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जब यह कहा कि वह इस याचिका सुनवाई के लायक नहीं है, तो पिटीशनर के वकील ने याचिका वापस ले ली.

वकील ने वापस ली याचिका, कोर्ट ने किया खारिज

पीठ ने कहा कि याचिका वापस लिये जाने के कारण इसे खारिज किया जाता है. पिटीशनर के वकील ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने की घोषणा का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता देश पर हमला करने वाले किसी शासक के नाम पर मस्जिदों के निर्माण के खिलाफ है.

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Babri Masjid Case: आक्रमणकारी था बाबर

वकील ने कहा कि हुमायूं कबीर ने इस तथ्य के बावजूद मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की थी कि बाबर एक आक्रमणकारी था. कबीर के खिलाफ कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए. जब सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका खारिज करने की घोषणा की, तो वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी.

वकील ने कोर्ट से की थी ये मांग

याचिका में केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य सरकारों को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने और समूचे भारत में बाबर या बाबरी मस्जिद या उनसे मिलते-जुलते नामों पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण, स्थापना या नामकरण पर रोक लगाने या प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.

भारत पर आक्रमण करने वाले के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगे

याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे बाबरी मस्जिद, बाबर या भारत पर आक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार करने या परिपत्र और प्रशासनिक आदेश जारी करने पर विचार करें.

5 जजों की पीठ ने 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर दिया था ऐतिहासिक फैसला

नवंबर 2019 में शीर्ष अदालत की 5 जजों की संविधान पीठ ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने अयोध्या स्थित विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था. केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित करने का निर्देश दिया था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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