मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की उठी मांग

Updated at : 12 Apr 2026 6:46 PM (IST)
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मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की उठी मांग

मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की उठी मांग

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अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन सह विद्यापति पर्व समारोह का हुआ आयोजित सहरसा . विद्यापति चेतना समिति द्वारा रविवार को जिला परिषद के सभागार में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन सह विद्यापति पर्व समारोह का आयोजन किया गया. वहीं समिति सदस्यों द्वारा विशाल शोभा यात्रा निकाली गयी. यह यात्रा जिला परिषद से निकलकर डीबी रोड, शंकर चौक, थाना चौक होते कार्यक्रम स्थल पर पहुंची. इस मौके पर समिति द्वारा सभी अतिथियों को पाग, चादर व फूल माला पहनकर भव्य स्वागत किया गया. साथ ही कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा, मैथिल दधीचि बैजनाथ झा बैजू, अध्यक्ष राधाकांत ठाकुर, महेंद्र नारायण राम, बुजुर्ग पासवान, अमरनाथ शर्मा, प्रो विनोद झा, प्रो चंद्रशेखर झा, डोमीराम, ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण झा, प्रो गणेश कांत झा, हरिश्चंद्र झा, संरक्षक विभूतिभूषण झा, डॉ संजय वशिष्ट, अधिवक्ता राघव झा, शिव शिष्य भाई परमेश्वर, अधिवक्ता जीतेन्द्र नाथ झा, ललित नारायण मिश्र ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. जिसके बाद रानी झा द्वारा विद्यापति लिखित गोसाउनिक गीत जय जय भैरवि असुर भयाउनि एवं स्वागत गीत मंगलमय दिन आजू हे गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस मौके पर मुख्य अतिथि महेंद्र नारायण राम ने कहा कि मैथिली भाषा विश्व की सबसे प्राचीन व मधुरतम भाषा है. भाषा कला, साहित्य व संस्कृति की जननी व धरोहर है. जो रामायण काल से जुड़ी हुई है. माता सीता का दूसरा नाम मैथिली है. मैथिली भाषा 2003 में संविधान की अष्टम अनुसूची मे शामिल किया गया. वहीं संविधान का अनुवाद मैथिली भाषा में किये जाने से हर्ष का माहौल है. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के माध्यम से मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने एवं राष्ट्रीय जनगणना में मातृभाषा मैथिली लिखाने का आह्वान किया. मंच संचालन जयराम झा एवं स्वागत भाषण डोमी राम ने दिया. कार्यक्रम के दौरान डॉ मनोज झा व शांति मिशन के डायरेक्टर विभूति भूषण झा को मिथिला रत्न एवं नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को मिथिला सम्मान से सम्मानित किया गया. बैजनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मिथिलावासियों को आर्थिक आजादी, सामाजिक आजादी, राजनीतिक आजादी, भाषिक आजादी, औद्योगिक आजादी के लिए संविधान में अलग मिथिला राज की मांग करते हैं. जिससे मिथिला को बाढ़ व सुखाड़ से निजात मिल सके.

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