परेशानी. प्राइवेट बस स्टैंड को डिपो में शिफ्ट करने की कवायद हुई धीमी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Feb 2016 5:30 AM (IST)
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बस डिपो कब बनेगा स्मार्ट अधिकारी व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की भेंट चढ़ा सरकारी व निजी डिपो सहरसा नगर : सरकारी बस डिपो को पहले ही गवां चुके सहरसा के लोगों को आधुनिक सुविधाओं से लैस बस स्टैंड मिलने का स्वप्न भी धूमिल होता जा रहा है. ज्ञात हो कि वर्तमान में रेलवे व नप […]
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बस डिपो कब बनेगा स्मार्ट
अधिकारी व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की भेंट चढ़ा सरकारी व निजी डिपो
सहरसा नगर : सरकारी बस डिपो को पहले ही गवां चुके सहरसा के लोगों को आधुनिक सुविधाओं से लैस बस स्टैंड मिलने का स्वप्न भी धूमिल होता जा रहा है. ज्ञात हो कि वर्तमान में रेलवे व नप की जमीन में बने बस स्टैंड में सुविधा के अभाव को देखते सुपर बाजार स्थित बेकार पड़े राज्य परिवहन के बस डिपो को स्मार्ट बनाने की जिला प्रशासन ने घोषणा की थी. नये बनने वाले बस डिपो से ही सरकारी व निजी बसों का परिचालन किये जाने की व्यवस्था शुरू की जाती.
ज्ञात हो कि एक तरफ सरकारी बस डिपो का कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, वहीं गंगजला स्थित बस स्टैंड में यात्री सुविधा के घोर अभाव के बाद प्रशासन ने सरकारी डिपो को संवारने की कवायद शुरू की थी, जो अभी तक फाइलों में बंद काम शुरू होने का इंतजार कर रही है.
हाइटेक था बस डिपो
बिहार सरकार द्वारा डिपो के स्थापना काल में ही यहां परिचालन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी तकनीकी सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. इसमें डिपो को अपना वर्कशॉप व पेट्रोल टंकी भी लगायी गयी थी. इसके बावजूद निगम की कुल नौ बसों को मरम्मत करने के बजाय वर्कशॉप में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया. इसे वर्ष 11 में राज्य सरकार द्वारा नीलामी के माध्यम से पटना की एक कंपनी को औने-पौने दाम में बेच दिया गया.
निजी स्टैंड भी बदहाल
बरसात का मौसम शुरू होते ही यात्रियों की फजीहत शुरू हो जाती है. स्टैंड कीचड़मय हो जाता है. लोगों को आने-जाने में भी दिक्कत होती है. बस स्टैंड की बदहाली भी किसी से छुपी हुई नहीं है. बस कर्मियों ने बताया कि नगर परिषद द्वारा स्टैंड की सड़कों पर सिर्फ झाड़ू दिया जाता है, लेकिन कभी भी परिसर के अंदर झाड़ू या सफाई नगर परिषद नहीं करवाता है.
जर्जर है यात्री शेड
बस पड़ाव स्थित यात्री शेड निर्माण के कुछ दिन बाद ही जर्जर हो गया था. शेड में रात के समय लोग मलमूत्र त्याग करने से भी नहीं चुकते हैं. इसके अलावा नशेड़ी किस्म के लोग सुबह से ही शेड के अंदर जमा होने लगते है. इस वजह से यात्रियों को सड़क किनारे धूप व बरसात का सामना करना पड़ता है. शाम ढलते ही नशेड़ियों का शोर सुनाई देने लगता है. कई बार निजी स्टैंड से बस की चोरी भी हो चुकी है.
बोले बस आॅनर
बस आॅनर मनोज कुमार मिश्र कहते हैं कि नगर परिषद सिर्फ टैक्स वसूल करता है, सुविधा कुछ नहीं है. जिला प्रशासन स्टैंड को डिपो में शिफ्ट कर देती तो आदर्श बस पड़ाव की स्थापना संभव थी.
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