चलने नहीं, तैरने योग्य हैं अनुमंडल की सड़कें

Published at :21 Jan 2016 1:32 AM (IST)
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चलने नहीं, तैरने योग्य हैं अनुमंडल की सड़कें

कीचड़ से लथपथ हो गयी नप की सड़क सिमरी नगर : इंद्र देवता की कृपा से साल की पहली बारिश ने ठंड बढ़ा दी है वही दूसरी ओर पूरे अनुमंडल की सड़कों की पोल खोल कर रख दी है. हल्की बारिश में ही अनुमंडल की लगभग सभी मुख्य सड़के और अंदरूनी मार्ग कीचड़ से लथपथ […]

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कीचड़ से लथपथ हो गयी नप की सड़क

सिमरी नगर : इंद्र देवता की कृपा से साल की पहली बारिश ने ठंड बढ़ा दी है वही दूसरी ओर पूरे अनुमंडल की सड़कों की पोल खोल कर रख दी है. हल्की बारिश में ही अनुमंडल की लगभग सभी मुख्य सड़के और अंदरूनी मार्ग कीचड़ से लथपथ हो गये. वहीं अंदरूनी इलाको की हालत तो और बुरी हो गयी है. ड्रेनेज के अभाव में बरसात का पानी सड़कों पर अठखेलियां कर रहा है एवं सड़कों पर गड्ढों में भरा पानी हादसों की आशंका को जन्म दे रहा है.

अनुमंडल अंतर्गत मुख्य बाजार, रानीबाग, शर्मा चौक, बलवा हाट, तेलिया हाट, पहाड़पुर आदि की सड़कों पर कीचड़ के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है. इधर सड़कों पर गड्ढे और गड्ढों में भरा पानी बाइक चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है.

स्टेशन चौक: डगर नहीं आसान

अनुमंडल के मुख्य चौक मे से एक स्टेशन चौक पर पहली बारिश ने ही जलजमाव की स्थिति उत्पन्न कर दी है. मुख्य चौक की वजह से इस मार्ग पर सदैव यातायात का दबाव रहता है.सड़क की हालत पूरी तरह खस्ता हो चुकी है और रही सही कसर रिमझिम गिरते पानी ने पूरी कर दी है. कीचड़ व गड्ढों से पटा पड़ा यह चौक स्टेशन से उतरने वाले यात्रियों के लिए सर दर्द बना है.सबसे ज्यादा परेशानी पैदल जाने वाले यात्रियों को होती है.बुधवार को छह यात्री स्टेशन से गंतव्य को जाने के दौरान फिसल कर गिर गये.

मुरली चौक : सड़क बन गयी नाली

सिमरी बख्तियारपुर के नरक के नाम से मशहूर मुरली चौक की स्थिति काफी दयनीय है. जिस कारण इस इलाके में रहने वाले लोगों को अपने ही घरों में रहना दुश्वार हो रहा है. सड़कें है नहीं, नालियां बनाई नहीं गई.आज हालात यह है कि सड़कें ही नालियां बनी हुई है. इस मुख्य सड़क से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है.

निवासी पिछले कई सालो से मांग तो करते है, लेकिन समस्याएं हल नहीं होती और लोग जिम्मेदारों को कोस कर रह जाते है. निवासी जितेंद्र केशरी ने बताया कि जब नगर पंचायत बना तब सारे विकास कार्य पूरे किए जाने का वादा किया गया था,आज हालत यह है कि हम अपने ही घरों तक आसानी से नहीं जा सकते. सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे स्कूली बच्चों को होती है.

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