मुङो नहीं दिया जा रहा काम करने का मौका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Feb 2015 12:49 PM (IST)
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सहरसा सदर : बिहार की राजनीति में बदलते परिवेश व मुख्यमंत्री पद पर मंडरा रहे खतरे को देख मुख्यमंत्री के चेहरे पर परेशानी को देखी जा सकती थी. निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देर सत्तरकटैया प्रखंड के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने जहाज से नीचे उतर लोगों को हाथ जोड़ प्रणाम किया. […]
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सहरसा सदर : बिहार की राजनीति में बदलते परिवेश व मुख्यमंत्री पद पर मंडरा रहे खतरे को देख मुख्यमंत्री के चेहरे पर परेशानी को देखी जा सकती थी. निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देर सत्तरकटैया प्रखंड के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने जहाज से नीचे उतर लोगों को हाथ जोड़ प्रणाम किया.
मंच पर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे पर पहले की चमक नजर नहीं आ रही थी. एक घंटे तक चले कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मंच पर काफी असहज नजर आ रहे थे. उनके चेहरे पर हंसी कम परेशानी व उदासी साफ दिख रही थी. मुख्यमंत्री की सभा में अपनी मांगों को लेकर पहुंचे एएसवी स्वयं सेवक सहित कई संगठनों के बैनर तख्ती को देख मुख्यमंत्री अपने गुस्से को रोक नहीं पाये और उनलोगों पर झल्ला उठे. अपने संबोधन के दौरान भी मुख्यमंत्री झंडा बैनर वालों पर ङिड़कते हुए कहा कि जहां भी देखो, सब लोग झंडा बैनर लिए चले आते हैं. उन्होंने अपनी परेशानी का इजहार करते कहा कि जो कुछ कहने के लिए यहां आये हैं.
वह नहीं कह पाये. उन्होंने कहा कि चाहे एएसवी हो या आशा, ममता, आंगनबाड़ी या शिक्षक, सभी के लिए वे कुछ करना चाहते हैं लेकिन उन्हें काम करने का मौका ही नहीं दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संगठन के लोग पटना में अपने-अपने शिष्टमंडल के साथ मुख्यमंत्री से समय लेकर पहुंचे.
सभी की समस्याओं का निदान किया जायेगा. पार्टी नेतृत्व के दबाव को लेकर मुख्यमंत्री अपनी कुरसी बचाने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी आड़े हाथ लेते हुए उन पर सरकार चलाने को लेकर कई आरोप लगाये. मीडिया में उनके इस्तीफे की चर्चा को लेकर मुख्यमंत्री ने मंच से खुले शब्दों में पार्टी नेतृत्व को भी चुनौती देते हुए शरद यादव द्वारा बुलाये गये विधायक दल की बैठक को असंवैधानिक करार दिया.
उन्होंने कहा कि बीस फरवरी को उनके द्वारा विधायक दल की बैठक बुलायी गयी है. उस बैठक में विधायकों का जो निर्णय होगा, उसे वे सहर्ष स्वीकार करने के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विधायक चाहेंगे तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं.
मुख्यमंत्री के मुद्दे को लेकर नीतीश की चुप्पी साधे रहने को लेकर मांझी ने नीतीश को भी आड़े हाथ लेते उन्हें भीष्म पितामाह की संज्ञा देते सब कुछ अपने आंखों के सामने होते देखते रहने और चुप्पी साधे रहने का आरोप लगाया. उन्होंने केसी त्यागी, नीरज कुमार जैसे लोगों द्वारा उनके नेतृत्व को लेकर उठाये जा रहे सवाल को लेकर गंभीरता से आरपार की लड़ाई का खुले मंच से एलान कर दिया. मुख्यमंत्री द्वारा मंच से इस तरह पहली बार किसी खुले सभा से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित अपने ही कैबिनेट के कई मंत्रियों पर आरोप लगाया. इससे मुख्यमंत्री की परेशानी व कुरसी बचाये रखने की चिंता स्पष्ट दिख रही थी.
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