बच्चों तक में लोकप्रिय था सुनील किराना
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Jan 2015 9:12 AM (IST)
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सहरसा : कम उम्र में ही व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के बाद शांत स्वभाव व मृदभाषी होने के कारण सुनील अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाता रहा. मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद ही 1992 से छोटे से किराना दुकान से व्यवसाय शुरू कर बढ़ते बाजारीकरण के बीच इस तरह ग्राहकों के दिल में अपनी जगह […]
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सहरसा : कम उम्र में ही व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के बाद शांत स्वभाव व मृदभाषी होने के कारण सुनील अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाता रहा.
मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद ही 1992 से छोटे से किराना दुकान से व्यवसाय शुरू कर बढ़ते बाजारीकरण के बीच इस तरह ग्राहकों के दिल में अपनी जगह बनायी कि दूर दूर के लोग उनके दुकान से खरीदारी करने के लिए अपने गली-मोहल्ले बाजार को छोड़ आते थे.
अत्यधिक सेल, कम मुनाफा अपनाने की नीति के कारण उनकी दुकान में किराने का हर समान ग्राहकों को बाजार व अपने गली-मोहल्ले की दुकान से कम दर पर वहां मिल जाता था. जिसके कारण शहरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी उनकी दुकान पर खरीदारी के लिए हर हमेशा भीड़ लगाये रहते थे. शहरी क्षेत्र के पॉलिटेक्निक, गौतम नगर, विद्यापति नगर, कोसी चौक तक के लोग उनके यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं. अपने पिता भुवन किशोर गुप्ता व छोटे भाई पंकज गुप्ता के सहारे अपने व्यवसाय को अपनी मेहनत के बल पर इस तरह आगे बढ़ाया कि उनके किराने की छोटी सी दुकान में लोगों के उपयोग आने वाली किराने से लेकर हर प्रकार का सामान उनके यहां मिल जाता था.
सुई धागे से लेकर जड़ी-बुटी, बिजली से संबंधित सामान चापाकल सहित कई प्रकार के मनिहारे के समान के लिए भी लोगों को उनके यहां से लौटना नहीं पड़ता था. सुनील के स्वभाव के कारण हर ग्राहक से उनका इस तरह संबंध स्थापित हो गया था कि ग्राहक उसे अपना समझ उनके यहां खरीदारी के लिए दूर दूर से खींचे चले आते थे. यहां तक कि महिलाएं व बच्चे भी उनके यहां किसी समान की खरीदारी के लिए बेहिचक आते थे. सबों के साथ आपसी सौहार्द व प्रेम का भाव रखने के कारण सुनील एक व्यवसायी होकर भी ग्राहकों का चहेते बन गये थे. किसी ग्राहक द्वारा अपनी मजबूरी बताने के बाद सुनील एक बार भी उसे उधारी देने से नहीं हिचकते थे.
उनकी मौत की खबर जैसे ही आग की तरह शहर में फैली, क्या बुजुर्ग क्या महिला और क्या बच्चे सभी उनकी दुकान की ओर दौड़ पड़े. हर कोई उसकी एक झलक पाने को बेताब दिख रहे थे.
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