हादसे के बाद रणक्षेत्र में तब्दील हो गयी कहरा कुटी से बेंगहा की सड़क
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Sep 2019 7:35 AM
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सहरसा : सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पुलिस प्रशासन की देरी से आने को लेकर जिस तरह लोगों का आक्रोश था कि यदि स्थानीय कुछ लोग व थानाध्यक्ष अपनी सूझबूझ का परिचय नहीं देते तो बड़ी घटना हो सकती थी. जिस तरह युवकों ने बस में तोड़फोड़ के बाद उसमें आग लगायी थी. यदि […]
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सहरसा : सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पुलिस प्रशासन की देरी से आने को लेकर जिस तरह लोगों का आक्रोश था कि यदि स्थानीय कुछ लोग व थानाध्यक्ष अपनी सूझबूझ का परिचय नहीं देते तो बड़ी घटना हो सकती थी. जिस तरह युवकों ने बस में तोड़फोड़ के बाद उसमें आग लगायी थी.
यदि ससमय आग पर काबू नहीं पाया जाता तो घनी आबादी में अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था. यदि बस का डीजल टैंक फटता तो उस पर काबू पाने में भी परेशानी होती.
मालूम हो कि घटना के बाद सदर थाना के पुलिस अधिकारी शिवपूजन कुमार सदल बल मौके पर पहुंचे. पुलिस को देखते ही शव के साथ सड़क को जाम कर रहे लोग आक्रोशित हो गये और पुलिस के विरूद्व नारेबाजी शुरू कर दी. स्थिति की गंभीरता को देख सअनि श्री कुमार मामले की जानकारी वरीय अधिकारी को दी. जिसके बाद पुअनि शिवशंकर कुमार, अवनीश कुंवर, पैंथर जवान व अन्य पहुंचे.
बस के बाहर व अंदर हुई जमकर तोड़फोड़: मृतक की पहचान के लिए भले ही किसी ने दिलचस्पी नहीं ली, लेकिन दर्दनाक मौत देख लोगों का आक्रोश अचानक चरम पर पहुंच गया. कहरा कुटी के समीप सड़क पर बांस बल्ला लगा व टायर जला लोगों ने यातायात बाधित कर दिया.
सड़क जाम में सभी लगे थे कि अचानक किसी ने जानकी ट्रेवल्स नामक बस को बेंगहा के समीप खड़ी रहने की जानकारी दी. अचानक दर्जनों की संख्या में युवक हाथ में लाठी, बांस व ईंट-पत्थर लेकर बेंगहा की ओर विदा हो गये. देखते ही देखते दर्जनों लाठी, बांस व ईंट पत्थर बस पर चलने लगे. पांच मिनट के अंदर पूरी बस को क्षतिग्रस्त कर दिया और अंदर में एक सीट में आग लगा दी.
इसी दौरान सदर थानाध्यक्ष का वाहन आते देख आक्रोशित लोग फरार हो गये. पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया. सदर थानाध्यक्ष ने माइक से लोगों को शांत रहने व तोड़फोड़ नहीं करने अन्यथा कानूनी कार्रवाई की बात कही. जिसके बाद लोग शांत हुए और शव को पुलिस कब्जे में लिया.
शव उठाने के लिए नहीं आया कोई आगे: पुलिस द्वारा शव कब्जे में लेने के बाद उसे उठाने के लिए पुलिस लोगों से अपील करती रही लेकिन कोई आगे नहीं आया. जिसके बाद सदर थानाध्यक्ष स्वयं शव को उठाने में जुटे तो अन्य कनीय अधिकारी व दो व्यक्ति आगे आया. जिसके बाद शव को वाहन पर चढ़ाया गया.
चर्चाओं का दौर शुरू: घटना के बाद लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं होती रही. कोई जानकी ट्रेवल्स से ही उतरने व आगे से जाने के दौरान चालक को नहीं दिखने पर चपेट में आने की बात तो कोई तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से मौत होने की बात कहते रहे. हालांकि यह अनुसंधान का विषय है.
पुलिस ही अनुसंधान के बाद कुछ स्पष्ट कर सकती है. वहीं अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान मृतक की पहचान सुपौल जिले के सफाई कर्मी के तौर पर होने की बात कही गयी. किसी ने सुपौल जिले के बैरों निवासी होने की बात कही. जिसके बाद सदर थानाध्यक्ष ने मामले की जानकारी सुपौल पुलिस को दी. हालांकि खबर लिखे जाने तक कोई पहचान नहीं हो पायी थी.
स्पीड पर रोक लगाने की मांग: घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि टर्न रहने के बाद भी वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती है. छोटी-मोटी घटनाएं तो रोज होते रहती है. लोगों ने प्रशासन से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने व लापरवाह चालकों पर कार्रवाई की मांग की. मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व बरियाही बाजार व बलुआहा में भी वाहन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है.
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