कंट्रोल यूनिट से चमत्कार की आस

Published at :15 May 2014 4:37 AM (IST)
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कंट्रोल यूनिट से चमत्कार की आस

कन्हैयाजी सहरसा : बस, 24 घंटों के बाद ही मधेपुरा जिला मुख्यालय के मतगणना केंद्र पर लोकसभा चुनाव में डाले गये मतों की विधानसभावार गिनती शुरू हो जायेगी. शुरू होने के घंटे भर बाद से रूझान भी आने शुरू हो जायेंगे. तीन से चार बजते-बजते जीत का सेहरा किसी एक प्रत्याशी के सर सजा उसे […]

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कन्हैयाजी

सहरसा : बस, 24 घंटों के बाद ही मधेपुरा जिला मुख्यालय के मतगणना केंद्र पर लोकसभा चुनाव में डाले गये मतों की विधानसभावार गिनती शुरू हो जायेगी. शुरू होने के घंटे भर बाद से रूझान भी आने शुरू हो जायेंगे. तीन से चार बजते-बजते जीत का सेहरा किसी एक प्रत्याशी के सर सजा उसे प्रमाण पत्र भी दे दिया जायेगा, लेकिन इस 24 घंटे के पूरे होने से पहले प्रत्याशी, कार्यकर्ता व पार्टी समर्थकों का मन कुछ ज्यादा ही उतावला हो रहा है.

परिणाम के घोषणा को लेकर उनकी बेचैनी कई गुणा बढ़ गयी है. मतगणना से पूर्व अंतिम घड़ी में चुनाव परिणाम की घोषणा किसके पक्ष में आने वाला है. कमोबेश सबको इसका अंदाजा और आभास हो गया है, लेकिन सभी अपने हृदय को मजबूत कर कंट्रोल यूनिट से कोई चमत्कार होने की उम्मीद लगाये बैठे हैं.

टीवी ने बढ़ा दी है धड़कन

पांच चरणों के चुनाव के बाद चुनाव आयोग ने जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा एक्जिट पोल किये जाने पर प्रतिबंध लगाया, लोग एकतरफा सोचने से घबराने लगे थे, लेकिन जैसे ही 12 तारीख की शाम यह प्रतिबंध हटा. सभी टीवी चैनलों के जान में जान आयी और एक्जिट पोल परोसने का सिलसिला शुरू हो गया. हालांकि खबरिया चैनलों का यह पूर्वानुमान पहले की तरह पूरी तरह एकतरफा ही रहा. इनके अनुसार देश में इस बार नरेंद्र मोदी की सरकार का बनना तय है. एक्जिट पोल में भाजपा व उनके सहयोगी दलों को आवश्यक दो तिहाई 272 से भी पार दिखाया जा रहा है. इस संभावित आंकड़े से मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र के भी भाजपा व उनके सहयोगी दल खुश हो रहे है. वे इसे पूरी तरह सही और मतदाताओं की नब्ज टटोलने के बाद किया गया अनुमान बता रहे हैं.

लेकिन शेष पार्टी इसे बकवास व जनता को दिग्भ्रमित करने वाला बताती है. वे मीडिया घरानों पर पैसे लेकर पार्टी विशेष के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाते हैं. कहते हैं कि 2004 व 2009 के चुनावों में भी इलेक्ट्रॉनिक टीवी चैनल वालों ने इसी तरह बढ़त के साथ दूसरे की सरकार बना डाली थी और मतगणना के बाद हश्र विपरीत हुआ. चैनल वाले औंधे मुंह गिरे थे. विभिन्न पार्टियों के स्थानीय नेता बताते हैं कि मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से भी जिसकी जीत की घोषणा चैनल ने पहले कर दी थी, मतगणना में वे तीसरे नंबर पर आये थे.

सब प्रत्याशी हैं एक्जिट पोल में

चूंकि टीवी चैनलों के एक्जिट पोल में सबसे अधिक भाजपा गठबंधन उसके बाद कांग्रेस गठबंधन और अंत में अन्य को दिखाया जा रहा है. लिहाजा मधेपुरा लोक सभा सीट से भी सभी प्रत्याशी अपना स्थान उसी में बना रहे हैं. एनडीए के लिए दिखाये जा रहे 272 सीटों में स्थानीय भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार सिंह कुशवाहा अपनी सीट सुरक्षित समझ रहे हैं तो राजद के राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी यूपीए के लिए बताये गये 115 सीटों में से एक पर अपना कब्जा बता रहे हैं.

क्षेत्र के वर्तमान सांसद जदयू प्रत्याशी भी तीसरे मोरचे के लिए बतायी जा रही 156 सीटों में मधेपुरा के भी शामिल होने की बात कह रहे हैं. हालांकि शरद टीवी चैनलों के एक्जिट पोल को बकवास व भरमाने वाला बताते कहते हैं कि आयोग को मतदान शुरू होने से लेकर अंत होने तक ऐसे किसी भी पूर्वानुमान के सार्वजनिक प्रदर्शन व प्रसारण पर रोक लगाना चाहिए था. बीच में रोक लगायी गयी, जब इसका देश भर में इसका विष फैल चुका था.

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