एक घंटे में 20 किमी का सफर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Sep 2016 4:37 AM (IST)
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गड्ढों के करण वाहन चलाना मुश्किल काम डेहरी (कार्यालय) : शेरशाह सूरी पथ के नाम से मशहूर जीटी रोड को फोरलेन में तब्दील किये जाने के बाद से उक्त सड़क का गुणगान करने वाले लोग अब उस सड़क की दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं. कभी डेहरी से सासाराम की दूरी मिनटों में पूरी करानेवाली […]
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गड्ढों के करण वाहन चलाना मुश्किल काम
डेहरी (कार्यालय) : शेरशाह सूरी पथ के नाम से मशहूर जीटी रोड को फोरलेन में तब्दील किये जाने के बाद से उक्त सड़क का गुणगान करने वाले लोग अब उस सड़क की दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं. कभी डेहरी से सासाराम की दूरी मिनटों में पूरी करानेवाली उक्त सड़क पर अब करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय करने में ही घंटे भर का समय लग जा रहा है. सड़क पर उभरे गड्ढे को अगर सुरक्षित ढंग से पार नहीं करते, तो आप कभी और कहीं भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं.
इस रास्ते पर सड़क की सब से खराब स्थिति वीर कुंवर सिंह चौक से ले कर करीब 10 किलोमीटर पश्चिम तक है. भारी वाहनों की आवाजाही के बीच छोटे वाहन चालकाें के लिए इन गड्ढों के पास संभलना काफी मुश्किल हो जाता है़ इसी रास्ते शहर के सबसे पुराने कॉलेज जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में आने-जानेवाले छात्र-छात्राओं के लिए मौत का कुआं बने उक्त गड्ढों में अब तक बाइक सवार कई लोग अपने हाथ-पांव तुड़वा चुके हैं.
ट्रकों से गिरनेवाला पानी बना कारण: सोन नद से भिंगे बालू लाद कर जाने वाले ट्रकों से हर समय पानी रिस कर सड़क पर गिरता रहता है़
यही पानी सड़क के टूटने व गड्ढा बनने का मुख्य कारण बन रहा है़ पिचिंग सड़क के लिए पानी सब से खतरनाक साबित होता है. जानकार बताते हैं कि अगर किसी भी पिचिंग सड़क पर पानी गिरता रहे, तो उस सड़क की लाइफ काफी कम हो जाती है. देश के सबसे अति व्यस्त सड़क माने जाने वाले एनएच-टू पर भारी वाहनों का काफी दबाव है़ उस पर ओवरलोड बालू लदे हजारों वाहनों से पानी सड़क पर चूते रहता है़
भरने के लिए एनएचएआइ को भेजा जायेगा पत्र
एसडीएम पंकज पटेल कहते हैं कि फोरलेन पर जान लेवा बने गड्ढों को भरने के लिए एनएचआइ को लिखा जा रहा है. साथ ही ओवरलोड व पानी टकपाते बालू लदे वाहनाें के विरुद्ध भी कार्रवाई की जायेगी.
बालू लदे वाहनों पर नहीं होती कार्रवाई
जिन बालू लदे वाहनाें से रिस कर पानी सड़क पर गिरता है उन पर कार्रवाई करने को लेकर एनएचएआइ के अधिकारी कदम नहीं उठाते हैं. कहने को तो प्रतिदिन सड़क की देख-रेख के लिए एनएचएआइ के दर्जनों वाहन जीटी रोड पर दौडते हैं. लेकिन, उनके द्वारा कभी सड़क को बर्बाद करने वाले वाहनों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
चेकिंग के नाम पर हुए सभी तामझाम फेल
ओवरलोडेड बालू लदे वाहनों व उन से सड़क पर चूने वाले पानी के विरुद्ध प्रशासन द्वारा काफी तामझाम के साथ बैरियर बनाये गये थे, जो आज कहीं नहीं दिखायी देते. बालू घाटों से बालू लदे वाहनों की जांच के लिए मकराइन कटार व फोरलेन पर पाली पुल के पास बैरियर लगा कर पुलिस के जवान तैनात किये गये थे. आज उक्त स्थलों पर बैरिया का कोई नामोनिशान नहीं बचा है. ऐसे में प्रशासन क्या संदेश देना चाहता है.
नियमों की हो रही अनदेखी
सोन नद से बालू लाद कर जाने वाले ट्रकों व ट्रैक्टरों को घाट के पास तब तक खड़ा रखना है जब तक लदे बालू से पानी का टकपना बंद न हो जाये. वैसे वाहनों का सड़क पर परिचालन पूर्ण रूप से बंद है. बावजूद इसके हजारों की तादाद में प्रतिदिन फोरलेन पर ऐसे वाहन दिख जायेंगे़
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