वट वृक्ष की पूजा कर सुहागिनों ने मांगा अखंड सुहाग का वरदान

Published by : AKHILESH CHANDRA Updated At : 16 May 2026 5:49 PM

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वट सावित्री का किया पूजन अनुष्ठान, शांति व समृद्धि के लिए मांगी मन्नतें

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वट सावित्री का किया पूजन अनुष्ठान, शांति व समृद्धि के लिए मांगी मन्नतें

सुहागिनों ने किया वट वृक्ष के पत्तों से श्रृंगार, परिक्रमा कर किया कथा श्रवण

पूर्णिया. सुहागिनों ने शनिवार को वट सावित्री की पूजा कर अपने सुहाग की सलामती के लिए वरदान और शांति व समृद्धि के लिए मन्नतें मांगी. सुहागिनों ने इस दौरान व्रत रखा और पूजन अनुष्ठान किया. वट वृक्षों के पूजन के बाद सुहागिनों ने वट वृक्ष के पत्तों से अपना श्रृंगार किया और कथा श्रवण के बाद विभिन्न प्रकार के फलों, मिष्ठान तथा वस्त्र दान की. पूजा के बाद व्रतियों ने मीठा भोजन कर उपवास तोड़ा.

शनिवार को शहर के हर मुहल्ले में वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की भीड़ लगी रही. सुहागिनें पारंपरिक श्रृंगार कर बांस के डलिया में पूजन सामग्री के साथ बरगद के पेड़ के नीचे पहुंची थीं. व्रतियों ने सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, फल और मिठाई से सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा की. इस दौरान वट वृक्ष की जड़ में दूध और जल चढ़ाया. इसके बाद हल्दी में रंगे कच्चे धागे को परिक्रमा कर पेड़ में लपेटा और पति व संतान की दीर्घायु होने की प्रार्थना की. पंडित सूरज भारद्वाज बताते हैं कि वट सावित्री पूजा को आदर्श नारीत्व का प्रतीक माना जाता है. बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. मान्यता के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शिव उपरी भाग में विराजते हैं. उन्होंने कहा कि सावित्री व्रत पति की लंबी उम्र और संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है. इसलिए सुहागिन महिलाएं वट सावित्री पूजा बड़े ही धूमधाम से करती है.

पंडितों ने किया सावित्री-सत्यवान का कथा वाचन

वट सावित्री की पूजा के दौरान महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. कई जगह कथा वाचन के लिए पंडितों को बुलाया गया था. कथा वाचन के बाद पंडितों को दान भी दिए गये. शास्त्रों की मानें तो पूजा में वट वृक्ष के तने में कच्चा सूत लपटते हुए प्रदक्षिणा की जाती है. वट वृक्ष के नहीं रहने पर दीवार पर वट वृक्ष का तस्वीर बनाकर भी पूजन करने का विधान है. पूजन के बाद सुहाग की सामग्री और एक पंखा दान करने करने उत्तम होता है. यह मान्यता है कि सत्यवान,सावित्री और यमराज का मिलन वट वृक्ष के नीचे ही हुआ था, इसलिए वट वृक्ष पूजनीय है. ऐसे पीपल को विष्णु रूप और वट को शिवरूप कहा जाता है. वट पूजा की चर्चा पुराणों में भी है.

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