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ट्रंप के टैरिफ से बिहार को टेंशन, मखाना लीची समेत इन वस्तुओं के निर्यात पर पड़ेगा असर

Updated at : 08 Apr 2025 9:18 AM (IST)
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Trump Tariff: नये टैरिफ से न केवल मखाना और लीची जैसे फलों के निर्यात पर असर पड़ेगा, बल्कि मिथिला पेंटिंग, सिक्की कला पर तैयार कलाकृतियां अमेरिका को थोड़ी मात्रा में भेजी जा रही हैं. टैक्स बढ़ोतरी से इस सेगमेंट के उत्पादों के निर्यात में बाधा उत्पन्न हो सकती है.

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Trump Tariff: पटना. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार का असर बिहार पर भी दिखेगा. किसान और व्यापारी दोनों अमेरिकी फैसले से डरे हुए हैं. व्यापारी कह रहे हैं कि मखाना, लीची, आम और हल्दी जैसे मसालों के निर्यात पर नए टैरिफ का असर होगा. बिहार से बड़े पैमाने पर मखाना, हल्दी, लीची, आम जैसे कृषि उत्पादों का अमेरिका निर्यात होता है. ट्रंफ के टैरिफ से इन चीजों की कीमतों में वहां इजाफा होगा. निश्चित रूप से इसका असर अमेरिका में इनके बाजार पर पड़ेगा.

600 टन मखाना होता है अमेरिका निर्यात

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए मखाना निर्यातक और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स से जुड़े सत्यजीत सिंह ने कहा कि भारत से हर साल लगभग 600 टन मखाना अमेरिका निर्यात होता है. टैरिफ में बढ़ोतरी के बाद मखाना की कीमतों में उछाल आएगा. दाम बढ़ने के कारण वहां के बादाम और अखरोट से प्रतिस्पर्धा में यह पीछे रह सकता है और लोकप्रिय रहने के बावजूद अमेरिकी बाजार में मखाना अपनी पकड़ को खो सकता है. मांग घटी तो फिर निर्यात भी घटेगा. भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को लागत में कटौती या वैकल्पिक बाजार की तलाश करनी पड़ सकती है.

बिहार से कई वस्तु जाती है अमेरिका

बिहटा ड्राईपोर्ट के राकेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष मखाना और हल्दी की खेप अमेरिका भेजी जा रही है. सीजन में लीची और आम भी भेजा जाता है. टैरिफ के बाद अमेरिका में इनकी कीमत ज्यादा होगी. यदि अमेरिका में मांग कम होती है तो निर्यात में गिरावट की आशंका है. बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय गुप्ता बताते हैं कि बिहार से बड़े पैमाने पर जर्दालु और मालदा आम तथा मुजफ्फरपुर की लीची का निर्यात अमेरिका होता है.

अमेरिका के बाजार में घटेगी बिहार की धाक

बिहार में इस समय मौसमी फलों और सब्जियों के निर्यात के लिए आधारभूत संरचना तैयार हो रही है. कोल्ड सप्लाई चेन की व्यवस्था खड़ी हो रही है. बिहार के उत्पादकों और अमेरिका के उपभोक्ताओं के बीच आपूर्ति की पटरी बिठाई जा रही है. ऐसे मौके पर कीमत में बढ़ोतरी से पूरी शृंखला की लागत बढ़ेगी और इसके निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ेगा. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमल नोपानी ने कहा कि बिहार से अमेरिका जानेवाली चीजों में कला सामग्रियां भी शामिल है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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