ePaper

Satuan : सतुआन के साथ जुड़-शीतल का आगाज, मिथिला नव वर्ष पर कल रहेगा चूल्हा बंद

Updated at : 14 Apr 2025 8:07 AM (IST)
विज्ञापन
jud sheetal

jud sheetal

Satuan : मिथिला समेत कई इलाकों में इसे नववर्ष के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन जल की पूजा की जाती है. शीतला माता से शीतलता बनाए रखने की कामना की जाती है.

विज्ञापन

Satuan: पटना. सतुआनी पर्व के साथ दो दिवसीय जुड़-शीतल त्योहार का आगाज हो गया है. इसके पहले दिन 14 अप्रैल को सतुआन तो दूसरे दिन 15 अप्रैल को धुरलेख होता है. जिस तरह से छठ सूर्य देव की उपासना का पर्व होता है ठीक वैसे ही जुड़ शीतल जल की पूजा का पर्व होता है. मिथिला समेत कई इलाकों में इसे नववर्ष के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन जल की पूजा की जाती है. शीतला माता से शीतलता बनाए रखने की कामना की जाती है.

शीतलता के इस लोकपर्व का प्रकृति से सीधा संबंध

छठ जैसे सूर्य की आराधना है, वैसे ही जुड़ शीतल जल की आराधना है. इस लोक पर्व का प्रकृति से सीधा संबंध होता है. इस दौरान मिथिला में सत्तू और बेसन की नयी पैदावार होती है. जिसका इस त्योहार में बड़ा महत्व होता है. गर्मी के मौसम में लोग सत्तू और बेसन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इससे बने व्यंजन जल्दी खराब नहीं होते. इसलिए जुड़ शीतल पर्व के पहले दिन सतुआन में सत्तू की कई चीजें बनाई जाती हैं. मिथिला ही नहीं असम, बंगाल, उत्कल में भी आज का पकाया हुआ भात कल खाया जायेगा. इसलिए आज पूरे दिन महिलाएं खास तौर पर बेसन और चावल से बने व्यंजन बनाती हैं. सतुआन के दिन मांसाहार वर्जित है. इस दिन आम दिनों की तरह प्याज-लहसुन का सेवन भी लोग नहीं करते हैं.

क्या होता है सतुआन के दिन

मिथिला के घर-घर में आज लोग तुलसी के पेड़ को नियमित जल देने के लिए एक घड़ा बांध देते हैं. ऐसा करने के पीछे की मान्यता है कि इससे पितरों की प्यास बुझ जाती है. इसके अलावा इस दिन कई घरों में कुलदेवता की पूजा की जाती है और उन्हें आटा, सत्तू, शीतल पेय, आम्रफल और पंखा अर्पित किया जाता है. आज कुलदेवी के पास पानी से भरा लोटा रखा जाता है, जिसका बासी पानी कल सुबह के समय माताएं अपने बच्चों के सिर डालकर थापा देती हैं. ऐसी मान्यता है कि इससे बच्चों पर पूरे साल शीतलता बनी रहती है. जिससे गर्मी से राहत मिलती है. दोपहर बाद लोग पेड़-पौधों में जल डालते हैं, जिससे वे सूखे नहीं. आज के दिन सत्तू का सेवन अनिवार्य रूप से किया जाता है. मान्यता है कि आज के दिन सत्तू खाने से कोई कभी भूखा नहीं सोता है.

धुड़खेल की रात होता है मांसाहार

जुड़ शीतल पर्व के दूसरे दिन धुरलेख होता है. इस दिन सभी लोग मिलकर सुबह से जल संग्रह के स्थलों जैसे कि कुआं, तालाब की सफाई करते हैं. इस दौरान एक दूसरे पर कीचड़ फेंक धुड़ (मैथिली में धुड़ का मतलब धुल होता है) खेल खेला जाता है. हास्य विनोद के इस खेल में समाज के सभी जाति और धर्म के लोगों की समान भागीदारी होती है. स्त्री-पुरुष सभी मिलकर जल संग्रह क्षेत्र की सफाई करते हैं, इसलिए पूरे दिन चूल्हे को आराम दिया जाता है. दोपहर बाद जहां महिलाएं रसोई को सुव्यवस्थित करती हैं, वहीं पुरुष शिकार करने जाते हैं. मिथिला के इलाके में इस दिन रात में मंसाहार खाने की परंपरा है.

Also Read: Mithila New Year : शीतलता का लोकपर्व है जुड़-शीतल, नये वर्ष पर पुत्र से पितर तक का रखा जाता है ख्याल

विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन