पटना में नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर में जल्द शुरू होगा शोध

Published by : JUHI SMITA Updated At : 09 Oct 2025 7:25 PM

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पटना में गंगा नदी के तट पर स्थापित नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर में शोध कार्य दिसंबर के अंत तक या जनवरी 2025 से शुरू होने की संभावना है.

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– फोटो है

-47 पदों के लिए लिए विभाग की ओर से मिली स्वीकृति

-30 करोड़ की लागत से शहर के किनारे गंगा नदी के तट पर पटना यूनिवर्सिटी की ढाई एकड़ जमीन पर बने जी प्लस टू भवन

संवाददाता, पटना

पटना में गंगा नदी के तट पर स्थापित नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर में शोध कार्य दिसंबर के अंत तक या जनवरी 2025 से शुरू होने की संभावना है. अभी तक बजट के अभाव में कोई उपकरण नहीं खरीदा गया है. लेबोरेटरी का निर्माण भी नहीं हुआ है. लेकिन सरकार के नये प्रधान सचिव ने सकारात्मक रुख अपनाकर इसे जल्द से जल्द शुरू करने के पक्ष में हैं. पटना यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के पास ढाई एकड़ जमीन पर 30.5 करोड़ की लागत से बने जी 2 भवन वाले इस सेंटर का उद्घाटन पिछले साल ही किया गया था, लेकिन अधिकारियों, वैज्ञानिकों व कर्मियों के पदों पर बहाली की स्वीकृति के इंतजार में काम रुका हुआ था. वहीं इसी महीने कैबिनेट से 47 पदों पर बहाली की स्वीकृति मिल गयी है. इन पदों में डॉल्फिन वैज्ञानिक, शोध साइंटिस्ट, प्रशासनिक पद व अन्य पद शामिल हैं. चुनाव के बाद इन पदों पर नियुक्ति की जायेगी. यह सेंटर भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल और बांग्लादेश सहित अन्य देशों के शोधार्थियों को भी विलुप्त हो रही गांगेय डॉल्फिन पर रिसर्च करने का अवसर देगा.

मछुआरों के लिए चलेगा जागरूकता अभियान

नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के अंतरिम निदेशक व डॉल्फिन विशेषज्ञ डॉ गोपाल शर्मा ने बताया कि शोध कार्य शुरू होते ही सबसे पहला काम मछुआरों और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाना होगा. इस अभियान के तहत, खासकर ब्रूडर फिशेस (अंडे देने वाली मछलियों) के संरक्षण पर जोर दिया जायेगा. डॉल्फिन के तेल के बदले मछली के तेल के उपयोग पर बल दिया जायेगा. मछुआरे के जाल में पिंगर लगाकर देखा जायेगा कि कितना सफल होता है. यह कार्य पूरे बिहार के बक्सर, भोजपुर, पटना, मुंगेर, भागलपुर और अररिया डिविजनों में किया जायेगा. इन क्षेत्रों के डीएफओ और जिला मत्स्य पदाधिकारी के साथ मिलकर संरक्षण योजना पर कार्य करेगा. डॉ शर्मा ने बताया कि बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसार, हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक नदियों में जाल लगाना प्रतिबंधित होता है, ताकि मछलियां ब्रीड कर सकें. जागरूकता अभियान का लक्ष्य मछुआरों को इस नियम और डॉल्फिन के अधिवास वाले क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया जायेगा. मछुआरों का प्रशिक्षण प्राथमिकता में होगा. पटना के पास वाटर मेट्रो प्रस्तावित है, उसका भी डॉल्फिन पर क्या प्रभाव पड़ता है इसे भी अंतराज्यीय जलमार्ग प्राधिकरण, वन विभाग एवं बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के साथ मिलकर निर्णय लिया जायेगा कि पटना के पास डॉल्फिन अधिवास में वाटर मेट्रो शुरू किया जाय या नहीं क्योंकि भूतकाल में पटना के पास गंगा में इको टूरिज्म का अच्छा अनुभव नहीं रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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