मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में क्यों नहीं मिली जगह, संगठन में मिलेगी बड़ी कुर्सी या दिल्ली की तैयारी?

Published by :Paritosh Shahi
Published at :07 May 2026 4:05 PM (IST)
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Mangal-Pandey-News

मंगल पांडे

Bihar Cabinet Expansion: बिहार कैबिनेट विस्तार में बीजेपी के मंगल पांडे को शामिल न करना सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला रहा. जानकारों का मानना है कि यह उनकी कोई हार नहीं, बल्कि बीजेपी की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है. पार्टी उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है या दिल्ली भेज सकती है.

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Bihar Cabinet Expansion: बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बीच सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को लेकर हो रही है. नई कैबिनेट में उनका नाम नहीं होने से कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. लंबे समय तक सरकार और संगठन दोनों में अहम भूमिका निभाने वाले मंगल पांडे को इस बार मंत्री पद नहीं मिलना सामान्य फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

सरकार से बाहर, संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की चर्चा

भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज है कि मंगल पांडे को सरकार से हटाकर संगठन में बड़ी भूमिका दी जा सकती है. बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कई राज्यों के प्रभारी तक रह चुके मंगल पांडे को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है.

पार्टी उन्हें आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. चर्चा यह भी है कि 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी और बड़े राज्यों की चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका बढ़ सकती है. इसके अलावा, उन्हें केंद्रीय राजनीति में भेजे जाने की संभावना भी जताई जा रही है.

नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा अब बिहार में नए नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बढ़ती दिख रही है. इस बार पार्टी ने कई नए चेहरों को मौका देकर साफ संकेत दिया है कि वह भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है.

मिथलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाकर भाजपा ने ब्राह्मण समाज में भी नए विकल्प तैयार करने की कोशिश की है. पार्टी का मानना है कि नए चेहरों से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बढ़ती है और राजनीतिक संदेश भी मजबूत जाता है.

सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

मंगल पांडे ब्राह्मण समाज से आते हैं और बिहार भाजपा में इस वर्ग का बड़ा प्रभाव रहा है. लेकिन इस बार पार्टी ने सवर्ण समाज के भीतर अलग-अलग चेहरों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. माना जा रहा है कि भाजपा उत्तर बिहार और अन्य क्षेत्रों में अपने सामाजिक आधार को नए तरीके से मजबूत करना चाहती है. इसी वजह से मंत्रिमंडल में नए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बनाए गए हैं.

एंटी इंकम्बेंसी से बचने का भी प्रयास

मंगल पांडे लंबे समय तक स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. ऐसे में भाजपा नेतृत्व शायद यह भी चाहता था कि कुछ विभागों में नए चेहरे और नई कार्यशैली लाई जाए. लंबे समय तक एक ही भूमिका में रहने वाले नेताओं को कभी-कभी संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर पार्टी नए प्रयोग करती है. इसे उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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राजनीतिक सफर खत्म नहीं, नई भूमिका की संभावना

मंगल पांडे का मंत्रिमंडल से बाहर होना उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं माना जा रहा. भाजपा में कई बार बड़े नेताओं को सरकार से हटाकर संगठन में ज्यादा प्रभावशाली भूमिका दी जाती रही है. अब सबकी नजर इस पर है कि पार्टी आने वाले दिनों में मंगल पांडे को बिहार, दिल्ली या राष्ट्रीय राजनीति में कौन सी नई जिम्मेदारी देती है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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