बिहार मंत्रिमंडल विस्तार: इंजीनियर से संगठनकर्ता तक, जानिए नए मंत्रियों का राजनीतिक सफर
बिहार मंत्रिमंडल विस्तार: इंजीनियर से संगठनकर्ता तक,
PATNA NEWS: बिहार की राजनीति में हुए बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को सरकार में जगह मिली है।
PATNA NEWS: बिहार की राजनीति में हुए बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को सरकार में जगह मिली है। इनमें ऐसे चेहरे शामिल हैं जिन्होंने संगठन, चुनावी राजनीति और प्रशासनिक अनुभव के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। आइए विस्तार से जानते हैं इन नेताओं के राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि के बारे में।
कुमार शैलेंद्र इंजीनियर से मंत्री बनने तक का सफर जाने
भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक कुमार शैलेंद्र पहली बार मंत्री बने हैं। साठ वर्षीय कुमार शैलेंद्र पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1991 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी।
कुमार शैलेंद्र ने बिहार के 74 वर्षों के चुनावी इतिहास में बिहपुर विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की थी और 2025 में लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए। भाजपा संगठन में उनकी छवि जमीनी नेता की रही है।
उनके पिता का नाम नित्यानंद सिंह है। क्षेत्र में विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ के कारण वे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल माने जाते हैं।
विजय कुमार सिन्हा: सख्त प्रशासक की पहचान
लखीसराय से भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा बिहार राजनीति के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद बनी एनडीए सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। साथ ही उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
विजय सिन्हा ने अपने विभाग में कई कड़े फैसले लेकर एक सख्त और ईमानदार प्रशासक की छवि बनाई। इससे पहले वे बिहार विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि गठबंधन टूटने के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा था। बाद में 2024 और फिर 2025 में एनडीए सरकार बनने पर उन्हें दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
वे 2010 से लगातार लखीसराय सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। उन्होंने बेगूसराय के पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से उनका जुड़ाव 1982 से रहा है, जिसने उनके राजनीतिक जीवन को मजबूत आधार दिया।
रामकृपाल यादव: लालू के करीबी से भाजपा के बड़े नेता तक का सफर
रामकृपाल यादव बिहार की राजनीति के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 12 सितंबर 1957 को पटना जिले में हुआ था। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
शुरुआत में वे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े और लंबे समय तक लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी रहे। वर्ष 1992 में वे पहली बार बिहार विधान परिषद (MLC) बने और 1993 में पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए।
2014 में टिकट विवाद के बाद उन्होंने RJD छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। उसी वर्ष उन्होंने पटना साहिब लोकसभा सीट से मीसा भारती को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की।
वे 2014 से 2019 तक केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रहे। 2014 और 2019 दोनों चुनावों में वे पटना साहिब से सांसद चुने गए। 2025 में उन्होंने पहली बार दानापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया।
शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल: RJD से JDU तक का सफर
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे स्नातक तक शिक्षित हैं और उनके पिता का नाम स्वर्गीय उपेंद्र मंडल था।
बुलो मंडल वर्ष 2000, 2005 और 2010 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे 2014 से 2019 तक RJD से सांसद भी रहे।
बाद में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थामा और गोपालपुर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ कायम रखी। ग्रामीण राजनीति और पिछड़े वर्गों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
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