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जंक फूड के बढ़ते चलन और शहरी क्षेत्रों में विटामिन-डी की कमी पर जतायी गयी चिंता

Updated at : 17 Jul 2025 7:08 PM (IST)
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जंक फूड के बढ़ते चलन और शहरी क्षेत्रों में विटामिन-डी की कमी पर जतायी गयी चिंता

बिहार सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से गुरुवार को पटना में ''अंकुरण'' स्कूल पोषण कार्यक्रम पर एक राज्य स्तरीय समीक्षा और अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया

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-अंकुरण स्कूल पोषण कार्यक्रम पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन संवाददाता, पटना बिहार सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से गुरुवार को पटना में ””अंकुरण”” स्कूल पोषण कार्यक्रम पर एक राज्य स्तरीय समीक्षा और अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों और किशोरों में कुपोषण और एनीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निबटने के लिए कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करना और इसे राज्यव्यापी विस्तार देने की रणनीति तैयार करना था. कार्यशाला में शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रतिनिधि और यूनिसेफ के विशेषज्ञ उपस्थित थे. विनायक मिश्र निदेशक मध्याह्न भोजन शिक्षा विभाग बिहार सरकार ने विद्यालयों को बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया. उन्होंने प्रोटीन युक्त भोजन और पोषण संबंधी जानकारी की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बच्चे स्वयं और अपने परिवार में स्वस्थ आदतें विकसित कर सकें. जंक फूड के बढ़ते चलन और शहरी क्षेत्रों में विटामिन-डी की कमी पर चिंता व्यक्त की. यूनिसेफ की तकनीकी भागीदारी की सराहना करते हुए मिश्र ने सभी जिला अधिकारियों से कार्यक्रम की सीख को जमीनी स्तर पर लागू करने का आह्वान किया. कार्यशाला में बताया गया कि वर्तमान में 18,000 विद्यालयों में संचालित अंकुरण कार्यक्रम को वर्ष के अंत तक 40,000 स्कूलों तक विस्तारित करने की योजना है. कॉम्प्रिहेन्सिव नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे (सीएनएनएस) के अनुसार, बिहार में 28% किशोर एनीमिया से पीड़ित हैं और 23% किशोरों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) सामान्य से कम है. इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ””अंकुरण”” कार्यक्रम स्कूलों में पोषण, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता और सामुदायिक जागरूकता को एकीकृत कर रहा है, विशेष रूप से कक्षा 1 से 8 तक के 6 से 14 वर्ष के बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. कार्यशाला में आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण (डब्ल्यूआइएफएस), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम , स्कूल पोषण वाटिका और स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता सत्र जैसे मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई. यूनिसेफ़ ने मिड-डे मील की गुणवत्ता विश्लेषण और स्कूल पोषण वातावरण मूल्यांकन के निष्कर्ष प्रस्तुत किया. कार्यशाला का संदेश था कि सरकारी विभाग, विद्यालय, स्वास्थ्यकर्मी और विकास साझेदार मिलकर ही ””अंकुरण”” कार्यक्रम को सफल बना सकते हैं. कार्यशाला का समापन आरके सिंह, सहायक निदेशक, मध्याह्न भोजन निदेशालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने सभी से विद्यालयों को स्वास्थ्य और पोषण संवर्धन का केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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