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Bihar News: पटना में दलदल में धंसा था बुजुर्ग, केवल सिर और हाथ था बाहर, जानिए कैसे बची जान...

Updated at : 26 Oct 2024 9:27 AM (IST)
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Bihar News: पटना में दलदल में धंसा था बुजुर्ग, केवल सिर और हाथ था बाहर, जानिए कैसे बची जान...

Bihar News: पटना में एक बुजुर्ग दलदल में फंसा हुआ था. जब एक युवक की नजर इसपर पड़ी तो जान की बाजी लगाकर उसने वृद्ध को बाहर निकाला.

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Bihar News: पटना में एक वृद्ध की जान बाल-बाल बची. बुजुर्ग किसी तरह बांस घाट के सामने दलदल में फंस गया. हालत कुछ ऐसी हो गयी थी कि वृद्ध दलदल में धंसते ही जा रहे थे. जब लोगों की नजर इसपर पड़ी तो पहले किसी को यह समझ में नहीं आया कि कोई दलदल में फंसा है. लेकिन बाद में जब गौर से देखा तो पता चला कि कोई आदमी दलदल में धंस रहा है. जिसके बाद एक युवक ने जान की बाजी लगाकर उस बुजुर्ग को बाहर निकाला. बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पटना में दलदल में फंसा था बुजुर्ग, हाथ और सिर ही बचा था बाहर

पटना के मरीन ड्राइव के पास बांस घाट के सामने दलदल में फंसे वृद्ध को युवक ने जान पर खेल कर बचाया. जानकारी के अनुसार बांस घाट के सामने मरीन ड्राइव पर डायल 112 की गाड़ी लगी थी. इसी दौरान लोगों की नजर दलदल में किसी की हलचल दिखायी दी. इस बात की जानकारी डायल 112 की पुलिस को हुई तो सभी ने गौर से देखा तो पता चला कि कोई दलदल में फंस गया है. उसका सिर्फ हाथ और सिर ही बाहर बचा है.

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बुजुर्ग को बचाने युवक ने जान की बाजी लगायी

बुजुर्ग की हालत देखने के बाद एक युवक जान पर खेलकर बांस के सहारे गया दलदल में गया और उसके पास किसी तरह पहुंचा. काफी देर से फंसने की वजह से वृद्ध अधमरा हो गया था. किसी तरह युवक ने वृद्ध को बाहर निकाला, जिसके बाद उसे इलाज के लिए पीएमसीएच भेज दिया गया. वृद्ध मानसिक रूप से विक्षिप्त है और उसकी पहचान नहीं हो पायी है.

पटना में घाट भी हैं दलदल

बता दें कि पटना में इन दिनों छठ पर्व को लेकर घाटों को भी दुरुस्त किया जा रहा है. घाघा, रानी और बरहरवा घाट पर से गाद निकालने में मजदूरों और घाट ठेकेदार के पसीने छूट रहे हैं. बीते माह भरी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर बढ़कर डेंजर लेवल के पास पहुंचने पर इन तीनों घाट पर ऊपर तक गंगा का पानी आ गया था जिसके कारण घाट की सीढ़ियां ही नहीं, प्लेटफार्म का एक बड़ा हिस्सा भी पानी में डूब गया था. बाढ़ के पानी के वापस लौटने के बाद गाद तो गंगा के कई अन्य घाटों पर भी जमी है और वंशी घाट, काली घाट आदि पर उन्हें कुदाल से कपचकर निकालने का काम भी हो रहा है. लेकिन इन तीनों घाटों पर कीचड़ और गीली मिट्टी की इतनी मोटी परत है कि वह दलदल का रूप ले चुका है और उसके भीतर प्रवेश कर उसे कपचना संभव नहीं है .

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ThakurShaktilochan Sandilya

लेखक के बारे में

By ThakurShaktilochan Sandilya

डिजिटल मीडिया का पत्रकार. प्रभात खबर डिजिटल की टीम में बिहार से जुड़ी खबरों पर काम करता हूं. प्रभात खबर में सफर की शुरुआत 2020 में हुई. कंटेंट राइटिंग और रिपोर्टिंग दोनों क्षेत्र में अपनी सेवा देता हूं.

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