Bihar News: बिहार में अब स्वास्थ्य विभाग करेगा ट्रैक, OPD में डॉक्टर-मरीज को कितना दे रहे है टाइम

AI जनरेटेड इमेज प्रतीकात्मक तस्वीर
Bihar News: सरकारी अस्पतालों में लाइन लंबी होती है, पर्ची बनती है, दवा मिलती है, लेकिन यह पता नहीं चल पाता है कि डॉक्टर ने मरीज को कितना वक्त दिया? अब इस सवाल का जवाब आंकड़ों में मिलेगा.
Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. विभाग अब यह ट्रैक करेगा कि डॉक्टर मरीज को वास्तविक रूप से कितना समय दे रहे हैं.
इसके लिए ओपीडी में इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में बदलाव की तैयारी की जा रही है, ताकि डॉक्टर के चैंबर में बिताए गए समय की अलग से रिकॉर्डिंग हो सके.
ओपीडी सॉफ्टवेयर में होगा अहम बदलाव
अब तक की व्यवस्था में मरीज के रजिस्ट्रेशन से लेकर दवा लेने तक का कुल समय दर्ज होता था. इससे यह साफ नहीं हो पाता था कि डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत में वास्तव में कितना वक्त लगा. नए बदलाव के बाद डॉक्टर के चैंबर में प्रवेश और बाहर निकलने का समय अलग से दर्ज होगा, जिससे परामर्श की वास्तविक अवधि सामने आएगी.
पीएचसी से जिला अस्पताल तक लागू होगी व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह नई ट्रैकिंग प्रणाली केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों की ओपीडी तक इसे लागू किया जाएगा. इससे ग्रामीण और शहरी—दोनों स्तरों पर मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता को परखा जा सकेगा.
औसतन 38 मिनट, लेकिन इलाज को कितना समय?
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल एक मरीज को ओपीडी में औसतन 38 मिनट लग रहे हैं. हालांकि इस समय में पर्ची कटवाना, इंतजार, जांच और दवा लेना सब शामिल है. नए सिस्टम के बाद यह साफ हो सकेगा कि इस पूरे समय में डॉक्टर ने मरीज को कितना समय दिया.
जवाबदेही और गुणवत्ता पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बदलाव से डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव नहीं, बल्कि सिस्टम में संतुलन आएगा. मरीजों को पर्याप्त समय मिल रहा है या नहीं, इसका आकलन संभव होगा और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम भी उठाए जा सकेंगे.
सरकारी अस्पतालों में इलाज को केवल संख्या नहीं, गुणवत्ता से जोड़ने की यह पहल आने वाले दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा तय कर सकती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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