सफलता शराबबंदी की कहानी गोपालगंज से : भटक रहे बच्चों को मिलने लगी स्कूल में तालीम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Nov 2016 7:15 AM

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नशे में धुत हो कर बाजार की गलियों में लड़खड़ाते सरल की जिंदगी तबाह हो गयी थी. जमीन शराब की भेंट चढ़ गयी. घर गिरवी रख कर शराब के नशे में रहने लगा. परिवार के लोगों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया था. पहले अच्छी-खासी दुकानदारी चलती थी, लेकिन शराब की लत ने […]

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नशे में धुत हो कर बाजार की गलियों में लड़खड़ाते सरल की जिंदगी तबाह हो गयी थी. जमीन शराब की भेंट चढ़ गयी. घर गिरवी रख कर शराब के नशे में रहने लगा. परिवार के लोगों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया था. पहले अच्छी-खासी दुकानदारी चलती थी, लेकिन शराब की लत ने उसे परिवार के साथ सड़क पर ला कर खड़ा कर दिया था. सरल के तीनों बेटे पढ़ाई छोड़ कर कमाने के लिए दूसरे प्रदेश चले गये. वहां से कमा कर पैसा भेजते थे और इधर सरल शराब में उड़ा देता था. आज शराबबंदी ने सरल की जिंदगी को नया जीवन दिया है.
30 वर्षों से नशे की लत का शिकार सरल अब शराब की तरफ मुड़ कर भी नहीं देखता है. हथुआ पुरानी चौक स्थित साइकिल दुकानदार सरल सोनी का जीवन बदल गया. शराब बंद होने से परिवार में हो रही कलह दूर हो गयी. वहीं परिवार की जिम्मेवारी भी अब निभा रहे हैं.
दुकान की कमाई से ही परिवार की रोजी रोटी चल रही है. सरल ने बच्चों का दाखिला बेहतर स्कूल में करा दिया है. घर में खुशी का माहौल है. सरल के बेटों की कमाई से धीरे-धीरे कर्ज को उतारा जा रहा है. सरल की पत्नी रधिया देवी की माने तो कल नरक का जीवन गुजार रही थी. उसे लगता था कि इस नरक में ही जीवन बीत जायेगी. वह सरकार को धन्यवाद देते हुए कहती है कि शराबबंदी ने जीवन में खुशियां भर दीं.
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