देशव्यापी एनआरसी "अनावश्यक" और इसका "कोई औचित्य" नहीं : नीतीश

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एनआरसी को "अनावश्यक" बताते हुए सोमवार को कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है. अनुसूचित जाति/जनजाति के वास्ते आरक्षण 10 साल के लिए और बढ़ाने के संवैधानिक संशोधन को मंजूरी देने के लिए बिहार विधानसभा के आहूत एकदिवसीय सत्र के दौरान प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में एनआरसी का मामला उठाया. इस पर नीतीश ने कहा कि ''एनआरसी का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.''

उन्होंने कहा कि केंद्र में राजीव गांधी की सरकार के समय असम के परिप्रेक्ष्य में एनआरसी की बात आयी थी. देशव्यापी एनआरसी की कोई बात नहीं थी. नीतीश ने कहा कि उन्हें इसका कोई एहसास नहीं है कि अनावश्यक एनआरसी राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आ सकता है. इसका कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विषय पर साफ साफ बोल दिया है, इसलिए एनआरसी वाली कुछ बात नहीं है.

तेजस्वी के जातिगत जनगणना, एनपीआर और सीएए पर भी सदन में चर्चा कराए जाने की मांग की ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा कि उन्हें कोई एतराज नहीं है. हर चीज पर चर्चा होनी चाहिए. अगर किसी चीज को लेकर लोगों के मन में अलग-अलग राय है, उसपर चर्चा होनी चाहिए. उनकी राय है कि सदन के अगले सत्र में इसमें इन विषयों पर चर्चा हो. उन्होंने कहा कि एनपीआर को लेकर जो भी शंकाए (नये प्रावधान जोडे़ जाने) उठायी जा रही हैं, उनपर वे जल जीवन हरियाली को लेकर आगामी 19 जनवरी को आयोजित की जाने वाली मानव श्रृंखला के बाद गौर करेंगे.

उल्लेखनीय है कि गत चार जनवरी को भाजपा के बिहार मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि बिहार में एनपीआर का कार्य 15 मई से 28 मई के 2020 के दौरान जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकान गणना के साथ किया जायेगा.

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