बिहार की 4 नदियों पर 51 पुलों का प्लान, अब मिनटों में पार होगी गंगा और कोसी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 01 Mar 2026 10:07 AM
सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: बिहार में आवागमन को तेज और सुगम बनाने के लिए सरकार ने बड़ी योजना पर काम शुरू किया है. राज्य की चार प्रमुख नदियों गंगा, सोन, कोसी और गंडक पर कुल पुलों की संख्या बढ़ाकर 51 करने का लक्ष्य रखा गया है. अभी 25 पुल चालू हैं, 14 पर काम जारी है और 12 नए पुलों का निर्माण जल्द शुरू होने वाला है.
Bihar News: बिहार की भौगोलिक बनावट में नदियां जितनी महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही बड़ी चुनौती आवागमन के लिए रही हैं. लेकिन अब नीतीश सरकार और केंद्र के साझा प्रयासों से बिहार की तस्वीर बदलने वाली है. राज्य की चार प्रमुख नदियों गंगा, सोन, कोसी और गंडक पर पुलों की कुल संख्या जल्द ही 51 होने जा रही है.
वर्तमान में जहां 25 पुल चालू हैं, वहीं 14 पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है और 12 नए पुलों का निर्माण जल्द शुरू होने वाला है. पथ निर्माण मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल के अनुसार, यह नेटवर्क न केवल समय बचाएगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार भी देगा.
नदी पार सफर होगा आसान, घटेगा समय
राज्य की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी पर सबसे अधिक पुलों का निर्माण प्रस्तावित है. अभी गंगा पर 8 पुल चालू हैं, लेकिन जल्द ही 8 और नए पुल इसे जोड़ने लगेंगे. इनमें जेपी सेतु और महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनने वाले नए लेन, कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल और साहेबगंज-मनिहारी के बीच बन रहे पुल शामिल हैं.
इसके अलावा, बख्तियारपुर-ताजपुर और विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे चार लेन पुलों से उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी सिमट जाएगी. आने वाले समय में मटिहानी-शाम्हो और कहलगांव में भी नए पुलों की सौगात मिलेगी.
गंगा पर सबसे ज्यादा पुलों का फोकस
सबसे अधिक पुल गंगा नदी पर बनाए जा रहे हैं. वर्तमान में इस नदी पर आठ पुल चालू हैं और आठ का निर्माण चल रहा है. इसके अलावा कई नए पुल प्रस्तावित हैं जिनमें बड़े एक्सप्रेसवे और फोर लेन कनेक्टिविटी वाले प्रोजेक्ट शामिल हैं. माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन में बड़ा बदलाव आएगा.
गंडक नदी पर सात पुल चालू हैं और कई नए पुलों का निर्माण प्रस्तावित है. कोसी पर पांच पुल चालू हैं, जबकि कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के तहत नए पुल बनाये जा रहे हैं. सोन नदी पर भी नए पुलों का निर्माण शुरू होने वाला है जिससे पश्चिम और दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
गंडक पर भी तेज निर्माण
गंडक नदी पर फिलहाल 7 पुल चालू हैं, लेकिन हाजीपुर से लेकर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तक नए पुलों का जाल बिछाया जा रहा है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के तहत बनने वाला छह लेन पुल और रामजानकी मार्ग पर सत्तरघाट का चार लेन पुल उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को बदल कर रख देगा. वहीं ‘बिहार का शोक’ कही जाने वाली कोसी नदी पर भी अब सफर सुरक्षित और तेज होगा.
कोसी पर 5 पुलों के अलावा भेजा-बकौर और फुलौत में निर्माण कार्य जारी है. पटना-पूर्णिया के बीच सिमरी-बख्तियारपुर के पास बनने वाला छह लेन पुल सीमांचल के लोगों के लिए वरदान साबित होगा.
सोन नदी पर भविष्य की राह
सोन नदी पर भी कनेक्टिविटी को विस्तार दिया जा रहा है. वर्तमान में 5 पुलों के साथ आवागमन जारी है, जबकि पंडुका में दो लेन पुल का काम चल रहा है. वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर और पटना-आरा-सासाराम मार्ग के तहत बनने वाले नए पुल दक्षिण बिहार के औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
इन पुलों के निर्माण से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि सुदूर इलाकों के किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुँचाने में आसानी होगी. बिहार अब वाकई ‘पुलों के प्रदेश’ के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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