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कैसे मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर? इजरायल को किसने बताया कहां हैं खामेनेई? एयरस्ट्राइक में गई जान

Updated at : 01 Mar 2026 11:26 AM (IST)
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How Ali Khamenei killed in Israel US Attack

अयातोल्लाह अली खामेनेई. फोटो- एक्स.

How Ali Khamenei killed: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामनेई की इजरायल और अमेरिकी हमले में मौत हो गई. वह अपने कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे, इसी दौरान मिसाइल अटैक में वह और उनके परिवार के कुछ लोग मारे गए. लेकिन चाक चौबंद, लेयर्ड सुरक्षा व्यवस्था का दावा करने वाले ईरान के लीडर को इजरायल ने मारा कैसे? इससे भी बड़ी बात इजरायल ने उन्हें खोजा कैसे?

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How Ali Khamenei killed: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हो गया. ईरान में सत्ता परिवर्तन पर आमादा इजरायल और अमेरिकी आखिरकार भारी पड़े.  ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की, जिसके बाद ईरान में 40 दिन के शोक की घोषणा की. अमेरिकी मीडिया के अनुसार, हमले के वक्त खामेनेई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर के साथ अपने कार्यालय में बैठक कर रहे थे, तभी इजरायल ने उस स्थान पर स्ट्राइक की. लेकिन अपने देश की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे करने वाले ईरान में ऐसा कैसे हो गया? किसने खामेनेई की लोकेशन की सूचना दी?  

जून 2025 में इजरायल ने अली शमखानी पर हमला किया था और तब उनकी मौत का दावा भी किया गया था, लेकिन करीब एक महीने बाद वे जीवित पाए गए. अब माना जा रहा है कि शमखानी की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए ही अमेरिका और इजरायल खामेनेई तक पहुंच पाए. खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका लंबे समय से अली शमखानी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे. शनिवार को जैसे ही वे खामेनेई से मिलने पहुंचे, दोनों देशों ने मिलकर कार्रवाई की. इस हमले में 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर की मौत हो गई.

खामेनेई की सुरक्षा व्यवस्था में घुसा था मोसाद

एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति मह्मूद अहमदीनेजाद के अनुसार, देश की गुप्त सेवा ने ईरान के भीतर सक्रिय मोसाद एजेंटों को निशाना बनाने के लिए एक विशेष यूनिट बनाई थी. लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उस यूनिट का प्रमुख खुद मोसाद का ऑपरेटिव था. उसके साथ करीब 20 अन्य एजेंट भी जुड़े हुए थे. इन्हीं की जानकारी के आधार पर इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाया. इजरायल के हमले के बाद ही यह दावा किया गया था कि खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है, लेकिन उनकी कार्यालय में मौजूदगी यह दर्शाती है कि उनके छिपे होने की खबरें दुश्मनों का मनोवैज्ञानिक प्रचार मात्र थीं.

मिसाइल अटैक में मारे गए खामेनेई

रिपोर्टों के मुताबिक मोसाद को सुप्रीम लीडर की खुफिया बैठकों की सटीक जानकारी मिल चुकी थी. एजेंसी को पता चला कि शनिवार सुबह करीब 9 बजे राष्ट्रपति भवन के भीतर एक अहम बैठक होने वाली है. बताया गया कि सुप्रीम लीडर लंबे समय से अंडरग्राउंड थे, इसलिए जैसे ही उनकी लोकेशन कन्फर्म हुई, उस कंपाउंड पर 30–40 मिसाइलें दाग दी गईं और पूरा परिसर मलबे में बदल गया. 

खामेनेई की तस्वीर देखने के बाद ट्रंप-नेतन्याहू की घोषणा

खामेनेई की हत्या का दावा सबसे पहले इजरायल की ओर से किया गया. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि एक विशेष ऑपरेशन में खामेनेई को मार गिराया गया. इसके बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दावे की पुष्टि की. अमेरिकी मीडिया आउटलेट स्पेक्ट्रम और इजरायल के चैनल 12 इंडेक्स के अनुसार, घोषणा से पहले ट्रंप को खामेनेई का शव दिखाया गया था. सार्वजनिक प्रसारक कान ने भी बताया कि वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों को खामेनेई के मारे जाने की सूचना दे दी गई थी. उनका शव तेहरान स्थित उनके कंपाउंड के मलबे से बरामद हुआ.

और कौन-कौन मारा गया?

इजरायली सेना के अनुसार, शनिवार शाम 200 फाइटर जेट्स के जरिए ईरान के भीतर करीब 500 ठिकानों पर भारी हमले किए गए. इन हमलों में शीर्ष ईरानी शासन को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें कम से कम 40 वरिष्ठ नेता और अधिकारियों के माने जाने का दावा किया जा रहा है. इजरायल के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई महीनों से तैयार किए गए एक ऑपरेशनल प्लान का हिस्सा थी, जिसका मकसद खुफिया जानकारी जुटाना था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कब और कहां वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एकत्र होंगे.  मृतकों में ईरान के रक्षा मंत्री आमिर नसीरजादेह, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली शमखानी और सुप्रीम लीडर के सैन्य सचिव मोहम्मद शिराजी, इस्लामिक रिपब्लिक ज्यूडिशियरी के प्रमुख गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई शामिल बताए जा रहे हैं.

खामनेई की मौत के बाद शहीद का दर्जा

ईरानी मीडिया ने खामेनेई की तुलना इमाम हुसैन से की है. फारस न्यूज एजेंसी ने लिखा कि वे हजरत अली की तरह जिए और इमाम हुसैन की तरह शहीद हुए. खामेनेई की मौत के बाद उनके अकाउंट से कुरान की आयत वाला एक ट्वीट शेयर किया गया. इसमें लिखा था, अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपालु, दयावान है. ईमान वालों में ऐसे पुरुष हैं जिन्होंने अल्लाह से किए गए अपने वचन को पूरा कर दिखाया. उनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपना वचन निभा दिया, और कुछ ऐसे हैं जो अभी प्रतीक्षा में हैं; और उन्होंने अपने मार्ग में रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं किया है. (पवित्र क़ुरआन, 33:23)

जवाब में ईरान ने दहलाया मिडिल ईस्ट

इस हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य बेटी, दामाद, बहू और पोते-पोती भी मारे गए. ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि खामेनेई की मौत का बदला अमेरिका से लिया जाएगा और देश चुप नहीं बैठेगा. खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं. दुबई, दोहा (कतर), बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए. इन कार्रवाइयों से खाड़ी देशों में भारी दहशत फैल गई है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट की आशंका जताई जा रही है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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