पटना :4 साल बाद पौधारोपण का लाभ मिलेगा, बदलेगी आबोहवा
Updated at : 04 Dec 2019 8:50 AM (IST)
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पटना : प्रदेश में 17 फीसदी हरित आवरण प्राप्त करने के लिए किये जा रहे पौधारोपण का फायदा राज्य की आबोहवा को चार साल बाद मिलने लगेगा. इससे वातावरण में हवा की शुद्धता बढ़ेगी. यहां के जलवायु में परिवर्तन होगा. फसल चक्र में सुधार होगा. साथ ही न्यूनतम व अधिकतम तापमान की स्थिति सुधरेगी. फिलहाल […]
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पटना : प्रदेश में 17 फीसदी हरित आवरण प्राप्त करने के लिए किये जा रहे पौधारोपण का फायदा राज्य की आबोहवा को चार साल बाद मिलने लगेगा. इससे वातावरण में हवा की शुद्धता बढ़ेगी. यहां के जलवायु में परिवर्तन होगा.
फसल चक्र में सुधार होगा. साथ ही न्यूनतम व अधिकतम तापमान की स्थिति सुधरेगी. फिलहाल राज्य का हरित आवरण 15 फीसदी हो चुका है. 2022 तक इसे दो फीसदी बढ़ाकर 17 फीसदी करने का लक्ष्य है. 2020 में पांच करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है. उसमें से एक ही दिन ढाई करोड़ पौधे लगायें जायेंगे. इस साल केवल वन महोसत्व के दौरान राज्य में एक करोड़, 32 लाख पौधे लगाये गये.
सूत्रों का कहना है कि पौधारोपण के लिए अप्रैल, 2020 तक वन व कृषि विभाग, उद्यान्न सहित कृषि विश्वविद्यालयों की नर्सरी में सात करोड़ पौधे तैयार किये जायेंगे. इससे प्रत्येक पंचायत में दो हजार पौधे लगाये जायेंगे. अगले तीन साल में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य में सात करोड़, 70 लाख पौधे लगेंगे.
क्या कहते हैं पर्यावरणविद
पर्यावरणविद और तरुमित्र के नेशनल डायरेक्टर फादर रॉबर्ट एथिकल ने बताया कि राज्य का हरित आवरण बढ़ने का फायदा यहां के लोगों को मिलेगा. हवा की शुद्धता बढ़ेगी. यहां के जलवायु में परिवर्तन होगा. साथ ही न्यूनतम और अधिकतम तापमान में भी सुधार होगा.
उन्होंने कहा कि कम से कम छह फीट लंबाई के पौधों को लगाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में पौधों के जीवित रहने की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि पौधारोपण से अधिक महत्वपूर्ण उनकी देखभाल करना है. इसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. साथ ही स्कूल के बच्चे भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
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