न्यूटन की एक थियोरम को पांच तरीके से किया हल

Updated at : 15 Nov 2019 5:46 AM (IST)
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न्यूटन की एक थियोरम को पांच तरीके से किया हल

पटना : 1991 में न्यूटन की एक थियोरम (बायोनाेमियल परिमेय) a+x पर पॉवर एन का हल पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नहीं कर सके थे. उस थियोरम को दिवंगत डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने पटना विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डाॅ जगन्नाथ सिंह की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय के गणित के छात्र मनोज कुमार सिंह को समाधान कर […]

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पटना : 1991 में न्यूटन की एक थियोरम (बायोनाेमियल परिमेय) a+x पर पॉवर एन का हल पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नहीं कर सके थे. उस थियोरम को दिवंगत डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने पटना विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डाॅ जगन्नाथ सिंह की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय के गणित के छात्र मनोज कुमार सिंह को समाधान कर दिया. डाॅ वशिष्ठ ने इस थियोरम को पांच तरीके से हल कर दिया.

यही नहीं उन्होंने इस थियोरम को काल्पनिक नंबर से भी साबित किया,जबकि यह सभी जानते हैं कि ये थियोरम वास्तविक नंबरों के लिए ही थी. जब मनोज सिंह उस समाधान को लेकर उनके पैतृक आवास से निकले तो डाॅ वशिष्ठ बोले कि ‘बबुआ, ई छठ्ठा तरीका भी ले जा. काम आयी’. गणित की इस समस्या को गणित जगत में काफी चर्चा मिली थी.
मनोज उन दिनों की बात याद करते हैं कि उनमें गजब की जीवंतता थी. उनकी मनोदशा कैसी भी रही हो, लेकिन गणित के संदर्भ में वे गॉड फादर थे. मनोज ने बताया कि न्यूटन की मॉडलस से जुड़ी मान्यता को उन्होंने नया मत दिया. न्यूटन के मुताबिक मॉडलस केवल धनात्मक होता है, जबकि वशिष्ठ बाबू ने उसे ऋणात्मक भी साबित किया. डाॅ सिंह के लंबे समय से करीब रही मनोज ने उनके नाम से शुक्रिया प्रोजेक्ट के जरिये गरीब बच्चों को पढ़ाया है. मनोज उनके नाम से अब पुरस्कार शुरू करना चाहते हैं.
किराये के मकान में गुजरी विख्यात गणितज्ञ की जिंदगी : दिवंगत गणितज्ञ डा वशिष्ठ नारायण सिंह की पटना में किराये के मकान में रहे. कुल्हड़िया अपार्टमेंट में उन्हें किराये का मकान नेतरहाट विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों और उनके चाहने वालों ने दिलाया था.
डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन की खबर सुन रो पड़े कमलेश और भोरिक
आरा. डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन की खबर सुनकर कमलेश राम और भोरिक राम रो पड़े. इन्हीं दोनों ने सात फरवरी 1993 को डॉ वशिष्ठ को छपरा के डोरीगंज में कूड़ा-कचरा में भोजन सामग्री ढूंढ़ने के बाद एक बंद दवा दुकान के शटर के नीचे बैठे हुए देखा था. उस समय डॉ वशिष्ठ का हुलिया भिखारी जैसा था. उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, लेकिन कमलेश और भोरिक ने उन्हें पहचानने में देर नहीं की.
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