राज्य में बिजली की खपत बढ़ी, तो शुरू हो गया आना-जाना, परेशानी

Updated at : 23 May 2019 5:15 AM (IST)
विज्ञापन
राज्य में बिजली की खपत बढ़ी, तो शुरू हो गया आना-जाना, परेशानी

पटना : राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की आंख-मिचौनी भी शुरू हो गयी है. जर्जर तार गर्मी में बिजली की खपत का बोझ सह नहीं पा रहे. पूरे प्रदेश में बिजली कटौती से आमलोग परेशान हैं. राजधानी पटना का हाल यह है कि करीब 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच शहर के आशियाना-दीघा […]

विज्ञापन

पटना : राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की आंख-मिचौनी भी शुरू हो गयी है. जर्जर तार गर्मी में बिजली की खपत का बोझ सह नहीं पा रहे. पूरे प्रदेश में बिजली कटौती से आमलोग परेशान हैं. राजधानी पटना का हाल यह है कि करीब 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच शहर के आशियाना-दीघा रोड में मंगलवार की रात और बुधवार सुबह लगातार बिजली आती-जाती रही.

कंकड़बाग के भूतनाथ इलाके में बुधवार की सुबह करीब तीन घंटे तक बिजली गायब रही. अनिसाबाद इलाके में रात नौ से दस बजे के बीच करीब चार बार बिजली आती-जाती रही. वहीं, भागलपुर शहर के भीखनपुर इलाके में करीब चार घंटे तक बिजली नहीं रही. बिजली कंपनी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों राज्य में सामान्य खपत करीब 4600 मेगावाट रही है.
जबकि, अधिकतम खपत करीब 4800 मेगावाट रहा. वहीं पटना में यह 500 से 550 मेगावाट रहा. हालांकि, गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की खपत करीब 5000 मेगावाट तक पहुंच गयी है. वहीं, ग्रिड की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ फीडरों का मेंटेनेंस किया जा रहा है, लेकिन मेंटेनेंस के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी से इस काम की गति धीमी है. इसका असर यह दिख रहा है कि गर्मी बढ़ते ही फीडरों पर लोड बढ़ने से ट्रिपिंग की समस्या होने लगी है.
ट्रिपिंग का सबसे बड़ा कारण हैं जर्जर तार
बिजली नहीं रहने के बारे में जब उपभोक्ताओं ने बिजली कंपनी को फोन कर जानकारी दी तो केवल जवाब मिलता रहा कि फॉल्ट है. इसे ठीक किया जा रहा है. इन सबके बावजूद ट्रिप (बिजली आने-जाने) की समस्या का समाधान नहीं हुआ. बिजली कंपनी के सूत्रों का कहना है कि बिजली ट्रिप करने की बड़ी वजह जर्जर तार, टूटे हुए सेपरेटर और खराब एरियर बंच केबल बताये जा रहे हैं. वहीं गर्मी बढ़ने के साथ ही ट्रांसफॉर्मरों में अर्थिंग की एक नयी समस्या होने लगी है. इस कारण वोल्टेज की कमी होने लगी है.
25-30% बिजली हो रही नष्ट
राज्य में हर घर बिजली पहुंचने से बिजली की खपत और तारों पर
लोड बढ़ा है. तार कई जगहों पर 15-20 साल पुराने हैं और जर्जर हो चुके हैं. इन तारों को बदलने में तीन से चार घंटे का समय लग जाता है. जर्जर तारों व जंपर के बार-बार टूटने के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित भी होती है. वहीं, इसकी वजह से 25-30 फीसदी बिजली बर्बाद होती है. ऐसे में पुराने बिजली के तारों को बदलने का निर्णय लिया गया.
तार बदलने के लिए 31 दिसंबर समय सीमा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राज्य में बिजली के जर्जर तारों से होने वाले हादसों पर चिंता जतायी थी. उन्होंने 31 दिसंबर तक सभी जर्जर तार बदलने का बिजली कंपनी को टास्क दिया था. राज्य में 72 हजार किमी में तार बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. वहीं 40 हजार किमी नये एरिया में नये तार लगाये जाने थे.
इनमें से करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है. इसके लिए सरकार ने साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को 14 अरब 18 करोड़ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को 16 अरब 52 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये हैं. इस योजना में शहरी क्षेत्रों के बिजली तारों को बदल कर एरियल बंच केबल लगाये जाने थे, यह काम चल रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन