तनाव से हार गया सुरक्षाबल का जवान
Updated at : 19 May 2019 2:22 AM (IST)
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पटना : पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर शुक्रवार की रात को सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाला सीआरपीएफ के 224 बटालियन में तैनात जवान गिरियप्पा तनाव का शिकार था. पत्नी का फोन आने के बाद उसका तनाव और बढ़ गया. हथियार हाथ में था ही, इसलिए खुद पर गोली […]
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पटना : पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर शुक्रवार की रात को सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाला सीआरपीएफ के 224 बटालियन में तैनात जवान गिरियप्पा तनाव का शिकार था. पत्नी का फोन आने के बाद उसका तनाव और बढ़ गया. हथियार हाथ में था ही, इसलिए खुद पर गोली चलाने में उसे एक पल भी नहीं लगा.
बिहार में इससे पहले भी घटनाएं हुई हैं जिसमें जवानों ने सर्विस हथियार का इस्तेमाल देश के दुश्मनों पर करने की बजाय अपनी ही जान लेने में किया है. कुछ दिन पहले पांच मई को हाजीपुर के सदर थाना क्षेत्र के बासुदेवपुर चपुता गांव में 65वीं बटालियन के जवान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.
जवान चौधरी ईश्वर गिरिधर महाराष्ट्र के पचोरा तहसील पिंपलगांव थाने के कुरहद गांव के निवासी था. उसकी ड्यूटी नक्सल प्रभावित पहेतिया के बूथ पर लगी हुई थी. सीआरपीएफ के एक कमांडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मोबाइल फोन सुरक्षा बल के जवानों के लिए घातक हो रहा है. जवान मोर्चा या ड्यूटी पर हथियार के साथ अकेला रहता है.
फोन पर कलह हो रहा है घातक : एकांत में फोन पर परिवार या प्रियजन से कलह के कारण पैदा हुआ तनाव आत्महत्या का कारण बन रहा है. आत्महत्या की घटना से सिपाही के परिवार का सम्मान ही नहीं जाता बल्कि, ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले सिपाही की तुलना में परिवार करीब 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद से भी हाथधो बैठता है.
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