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तलाक के लिए छह महीने इंतजार करना अनिवार्य नहीं

Updated at : 19 May 2019 2:03 AM (IST)
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तलाक के लिए छह महीने इंतजार करना अनिवार्य नहीं

पटना : अगर परिस्थितियां खास हों तो तलाक के लिए छह महीने का इंतजार अनिवार्य नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13बी(2) को अनिवार्य मानने से मना कर दिया है. इस धारा के तहत आपसी सहमति से तलाक के मामलों में भी अंतिम आदेश छह महीने बाद दिया जाता रहा है. […]

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पटना : अगर परिस्थितियां खास हों तो तलाक के लिए छह महीने का इंतजार अनिवार्य नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13बी(2) को अनिवार्य मानने से मना कर दिया है. इस धारा के तहत आपसी सहमति से तलाक के मामलों में भी अंतिम आदेश छह महीने बाद दिया जाता रहा है.

हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 बी (2) में कहा गया है कि फैमिली कोर्ट के जज के सामने दोनों (पति- पत्नी )की सहमति से तलाक का आवेदन आने और दोनों पक्षों को कोर्ट के सामने उपस्थित होकर आपसी सहमति से तलाक की मांग करने के 6 महीने बाद ही तलाक के आवेदन को स्वीकार करने का निर्णय फैमिली कोर्ट द्वारा दिया जाता था. कानून में इस अवधि का प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि पति-पत्नी में अगर सुलह मुमकिन हो तो दोनों इस अवधि के भीतर तलाक नहीं लेने पर विचार कर सकें. इस अवधि के बाद भी दोनों पक्ष साथ रहने को तैयार नहीं होते तो तलाक के आवेदन को स्वीकार कर तलाक का आदेश कोर्ट द्वारा दे दिया जाता है.

6 महीने का वक़्त लेना सिविल जज के विवेक पर निर्भर : पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और न्यायाधीश उदय यू ललित की पीठ ने इस अनिवार्यता को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अंतिम आदेश के लिए 6 महीने का वक़्त लेना सिविल जज के विवेक पर निर्भर करेगा .

अगर जज चाहें तो खास परिस्थितियों में तुरंत तलाक का आदेश भी पारित कर सकते हैं.कोर्ट ने उन ख़ास परिस्थितियों को भी अपने फैसले में भी स्पष्ट किया है जिनमें तलाक का आदेश तुरंत दिया जा सकता है . अगर 13 बी (2) में छः महीने का वक़्त और 13 बी (1) में एक साल का वक्त पहले ही बीत चुका हो. यानी तलाक के लिए आवेदन कोर्ट में देने से डेढ़ साल से ज़्यादा समय से पति-पत्नी अलग रह रहे हों. दोनों में सुलह-सफाई के सारे रास्ते बंद हो गये हों, और आगे भी सुलह की कोई गुंजाइश न हो. अगर दोनों पक्ष पत्नी के गुज़ारे के लिए स्थाई बंदोबस्त, बच्चों की कस्टडी आदि मुद्दों को पुख्ता तौर पर हल निकाल चुके हों. अगर 6 महीने का इंतजार दोनों की परेशानी को और भी बढ़ाने वाला नज़र आये.

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