पटना : बिना लेन-देन के पड़े डेढ़ लाख से अधिक खाते बंद करेगा एसबीआइ
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सुबोध कुमार नंदन स्थानीय मुख्यालय से खाताधारकों की भेजी जा रही सूची पटना : बैंक शाखाओं में वर्षों से बिना लेन-देने के बंद पड़े खातों को भारतीय स्टेट बैंक बंद करेगा. खाते को बंद करने की जिम्मेदारी शाखा प्रबंधकों को दी गयी है. जानकारी के अनुसार ऐसे खातों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है. […]
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सुबोध कुमार नंदन
स्थानीय मुख्यालय से खाताधारकों की भेजी जा रही सूची
पटना : बैंक शाखाओं में वर्षों से बिना लेन-देने के बंद पड़े खातों को भारतीय स्टेट बैंक बंद करेगा. खाते को बंद करने की जिम्मेदारी शाखा प्रबंधकों को दी गयी है. जानकारी के अनुसार ऐसे खातों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है. हर दिन बैंक शाखाओं को स्थानीय मुख्यालय से शाखा प्रबंधकों को खाताधारकों की एक सूची भेजी जा रही है.
इस काम को जल्द से जल्द निबटाने का दबाव बैंक प्रबंधकों पर है. इस कारण उन्हें अवकाश के दिनों में भी बैंक आना पड़ रहा है. पटना जिले में स्टेट बैंक की लगभग 135 शाखाएं हैं. इनमें शहरी क्षेत्र में 82, अर्द्धशहरी में 28 और 25 ग्रामीण क्षेत्र में शाखाएं हैं. हर शाखा में लगभग 1500 से अधिक एेसे खाते हैं जिसमें सालों से लेन-देन नहीं हुआ है.
कई खातों में 15 सालों से लेन-देन नहीं
अधिकारियों की मानें तो बंद होने वाले अधिकांश खातों में दस से 15 सालों से लेन-देन नहीं हुआ हैं और इन खातों में मिनिमम बैलेंस से काफी कम रकम है. इन खातों को बंद करने से पहले खाताधारक को नोटिस भेजा जाता है. नोटिस के बाद खाताधारक नहीं आता है तो बैंक खाता को बंद करने के लिए स्वतंत्र है.
एसबीआइ के सहायक महाप्रबंधक (जनसंपर्क) एम के सिंह ने कहा कि बचत खाता में सालाना मेटेनेंस फीस और सर्विस चार्ज खाताधारक को देना पड़ता है.
मिनिमम बैलेंस मेंटेन न करने पर बैंक खाताधारक से पेनल्टी वसूलता है. जैसे ही खाताधारक खाता में पैसा डालता है, बैंक पेनल्टी वसूल लेता है. ऐसी स्थिति में बैंक और ग्राहक के बीच विवाद पैदा हो जाता है. विवाद से बचने को खाता बंद करना ही बैंक मुनासिब समझता है.
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