लोकसभा चुनाव 2019: सवर्ण आरक्षण व जातीय जनगणना बिहार में एनडीए के लिए होगा बड़ा हथियार

पटना : राज्य सरकार ने आरक्षण के लाभ को सभी वर्गों की झोली में डाल दिया है. राज्य के गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के हक को कानूनी रूप दे दिया गया है. अपने शासनकाल में आरक्षण का विस्तार नहीं करने वाला राजद व कांग्रेस को घेरने के लिए एनडीए के पास यह बड़ा […]
पटना : राज्य सरकार ने आरक्षण के लाभ को सभी वर्गों की झोली में डाल दिया है. राज्य के गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के हक को कानूनी रूप दे दिया गया है. अपने शासनकाल में आरक्षण का विस्तार नहीं करने वाला राजद व कांग्रेस को घेरने के लिए एनडीए के पास यह बड़ा हथियार है.
वहीं, एनडीए ने आजादी के बाद पहली बार 2021 की जनगणना को जातीय आधार पर कराने की पहल शुरू की है. केंद्र सरकार के निर्णय के आधार पर राज्य सरकार ने जातियों की गणना पर मुहर लगा दी है. बताया जाता है कि राज्य में कुल जातियों की संख्या 246 हैं. इसमें अतिपिछड़े वर्ग की जातियों की संख्या 115 है, जबकि पिछड़ी जातियों की कुल संख्या 22 है. इसलिए, अतिपिछड़ी जातियां राजनीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
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