लोकसभा चुनाव 2019: सवर्ण आरक्षण व जातीय जनगणना बिहार में एनडीए के लिए होगा बड़ा हथियार

Updated at : 23 Feb 2019 3:52 AM (IST)
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लोकसभा चुनाव 2019: सवर्ण आरक्षण व जातीय जनगणना बिहार में एनडीए के लिए होगा बड़ा हथियार

पटना : राज्य सरकार ने आरक्षण के लाभ को सभी वर्गों की झोली में डाल दिया है. राज्य के गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के हक को कानूनी रूप दे दिया गया है. अपने शासनकाल में आरक्षण का विस्तार नहीं करने वाला राजद व कांग्रेस को घेरने के लिए एनडीए के पास यह बड़ा […]

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पटना : राज्य सरकार ने आरक्षण के लाभ को सभी वर्गों की झोली में डाल दिया है. राज्य के गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के हक को कानूनी रूप दे दिया गया है. अपने शासनकाल में आरक्षण का विस्तार नहीं करने वाला राजद व कांग्रेस को घेरने के लिए एनडीए के पास यह बड़ा हथियार है.

वहीं, एनडीए ने आजादी के बाद पहली बार 2021 की जनगणना को जातीय आधार पर कराने की पहल शुरू की है. केंद्र सरकार के निर्णय के आधार पर राज्य सरकार ने जातियों की गणना पर मुहर लगा दी है. बताया जाता है कि राज्य में कुल जातियों की संख्या 246 हैं. इसमें अतिपिछड़े वर्ग की जातियों की संख्या 115 है, जबकि पिछड़ी जातियों की कुल संख्या 22 है. इसलिए, अतिपिछड़ी जातियां राजनीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

राज्य सरकार केंद्र से कर चुकी है जनगणना की अनुशंसा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के इस मुद्दे का समर्थन करते हुए 2021 की जनगणना में जातियों की संख्या के आंकड़े जुटाने की अनुशंसा केंद्र से की है. इससे यह तस्वीर साफ हो जायेगी कि राज्य में किस जाति का क्या प्रतिशत हैं. आजादी के पहले 1931 में हुई जातीय जनगणना को ही आधार माना जाता रहा है.
इसी के आधार पर मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू की गयी थीं. यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके आधार पर एनडीए यह कह सकती है कि आजादी के 75 सालों तक न तो कांग्रेस और नहीं राजद ने इस तरह की पहल की. सामाजिक, आर्थिक व जातीय आधारित जनगणना 2011 इस उद्देश्य को पूरा ही नहीं कर पायी. एनडीए का यह मजबूत पक्ष है कि कांग्रेस यदि सवर्ण आरक्षण का पक्षधर थी तो उसने अपने कार्यकाल में इसे उपलब्ध क्यों नहीं कराया.
नीतीश ने आरक्षण को पंचायतों तक पहुंचाया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सत्ता में आते ही आरक्षण के प्रावधान को पंचायतों में विस्तार दिया गया. पंचायतों का चुनाव बिहार में 27 वर्षों बाद राजद के शासनकाल में 2003 में कराया गया था. अगर राजद की मंशा साफ होती तो उसे त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में एससी, एसटी व अतिपिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता था.
नीतीश कुमार ने सत्ता संभालने के बाद कराये गये पंचायत चुनावों में 20 प्रतिशत पद आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए और 17 प्रतिशत पद एससी व एसटी वर्ग के लिए आरक्षित कराया. इसी तरह आरक्षण के प्रावधान को पैक्स सहित अन्य सोसाइटी में इसे लागू किया गया. महिलाओं को भी इन संस्थाओं में 50 फीसदी अधिकार दिया गया.
देश के साथ बिहार में भी जनगणना 2021 के आरंभिक कार्य शुरू हो गये हैं. राज्य सरकार ने भी अपनी मंशा जता दी है कि वह जातियों की जनगणना के लिए तैयार है. 2021 की जनगणना में मुख्य रूप से ओबीसी की गणना महत्वपूर्ण है.
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