दृढ़ता से लक्ष्य की ओर बढ़ रही बिहार में ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड’ योजना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Feb 2019 6:12 AM
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2018-19 में 50,000 छात्र छात्राओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देने का लक्ष्य जैसे-जैसे स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ रहा है और लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं, इसका लाभ लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. पिछले वर्ष नवंबर तक लाभुक छात्र-छात्राओं की संख्या 21,649 थी, जिनमें 17289 छात्र और 4359 […]
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2018-19 में 50,000 छात्र छात्राओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देने का लक्ष्य
जैसे-जैसे स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ रहा है और लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं, इसका लाभ लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. पिछले वर्ष नवंबर तक लाभुक छात्र-छात्राओं की संख्या 21,649 थी, जिनमें 17289 छात्र और 4359 छात्राएं थीं.
वहीं इस वर्ष 21 जनवरी तक लाभुकों की संख्या बढ़कर 32,446 हो गयी है. इनमें 25,224 छात्र व 7221 छात्राएं हैं. साथ ही ट्रांसजेंडर की संख्या एक है. अब तक इस योजना के 31,839 लाभुकों के लिए 902 करोड़ 52 लाख 73 हजार 523 रुपये भी स्वीकृत हो गये हैं. इस साल कम-से-कम 50,000 छात्र-छात्राओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य है.
इस वर्ष के 21 जनवरी तक के 32,446 लाभार्थियों में सामान्य वर्ग के 11,879, पिछड़ा वर्ग के 12,689, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 4599, एससी के 2832 और एसटी के 447 विद्यार्थी शामिल हैं. लोन पाने वाले बिहार के प्रथम पांच जिलों में पटना-3051, मुजफ्फरपुर-1530, रोहतास-1448, गया-1375 और सारण-1360 हैं.
2018-19 में 50,000 विद्यार्थियों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ पहुंचाने के लक्ष्य की ओर सरकार तेजी से बढ़ रही है और कोशिश यह हो रही है कि इसमें हर जिले की लक्ष्य के हिसाब से समुचित भागीदारी सुनिश्चित हो सके. जिन जिलों में लाभुकों की संख्या लक्ष्य से कम है, उन्हें तेजी लाने का निर्देश दिया गया है.
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बिहार के निवासी वैसे विद्यार्थी, जिन्होंने बिहार या सीमावर्ती राज्यों से 12वीं की परीक्षा पास की हो तथा उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए इच्छुक हों, उन्हें बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए अनिवार्य है कि विद्यार्थी बिहार एवं अन्य राज्य या केंद्र की संबंधित नियामक एजेंसी से मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थान में नामांकन लिया गया हो या नामांकन के लिए चयनित हो.
यह ऋण उच्च शिक्षा के सामान्य कोर्सों, विभिन्न, व्यावसायिक एवं तकनीकी कोर्सों के लिए दी जा सकेगी. वर्ष 2018-19 में 50,000, वर्ष 2019-20 में 75,000 और वर्ष 2020 -21 में 1,00,000 अनुमानित विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ उपलब्ध कराने का प्रारंभिक अनुमान है. इसका लाभ लेने के लिए जाति और आय का बंधन नहीं है.
आवेदक विद्यार्थियों के हॉस्टल में रहने की स्थिति में आवेदक के शैक्षणिक संस्थान को राशि उपलब्ध करायी जायेगी. शिक्षण संस्थान के हॉस्टल में नहीं रहने की स्थिति में विद्यार्थियों के लिए फीस के अतिरिक्त अन्य रहने के खर्च के लिए वर्गीकृत शहरों के लिए निर्धारित की गयी राशि उपलब्ध करायी जायेगी.
महंगाई के आधार पर रहने और जीवनयापन की दर में आवश्यकतानुसार शिक्षा विभाग वृद्धि कर सकेगा.इसके तहत शिक्षा ऋण अधिकतम चार लाख रुपये तक किये जायेंगे. इस राशि पर मोरेटोरियम अवधि, जो कि पाठ्यक्रम समाप्ति से एक वर्ष तक या आवेदक के नियोजित होने के अधिकतम 6 माह (जो सबसे पहले हो ) तक ब्याज देय नहीं होगा.
इस राशि पर सरल ब्याज दर 4% होगी. इसके अंतर्गत महिला, दिव्यांग एवं ट्रांसजेंडर आवेदकों को मात्र 1% सरल ब्याज दर से ऋण उपलब्ध कराया जायेगा. खास बात है कि पढ़ाई को किसी भी कारण से बीच में छोड़ने पर ऋण की शेष राशि संस्थान या विद्यार्थी को उपलब्ध नहीं करायी जायेगी.
ऋण वापसी की प्रक्रिया के अंतर्गत मोरेटोरियम अवधि की समाप्ति के बाद दो लाख रुपये तक के ऋण को अधिकतम 60 मासिक किस्तों में और दो लाख से ऊपर के ऋण को अधिकतम 84 मासिक किस्तों में वापस किया जा सकेगा. उपरोक्त तय अवधि से पूर्व ऋण वापसी की स्थिति में 0.25% ब्याज दर की छूट दी जायेगी.
उपरोक्त अवधि में नियोजन नहीं होने या स्वरोजगार एवं अन्य साधनों से आय नहीं होने की स्थिति में ऋण वसूली स्थगित रखी जायेगी, लेकिन इसके लिए प्रत्येक जून व दिसंबर के अंतिम पखवारे में आवेदक को इस आशय का शपथ पत्र डीआरसीसी पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा. वैसे नौकरी नहीं मिलने की स्थिति में लोन की राशि को परिस्थितियों के अनुरूप सरकार द्वारा माफ करने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है.
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