पटना : जदयू के अंदर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं नीतीश कुमार
Updated at : 15 Oct 2018 5:41 AM (IST)
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पटना : जदयू को मजबूत करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं हैं. वह पार्टी के अंदर संगठन भी खड़ा कर रहे हैं और उसे चुनावी रंग में भी ढाल रहे हैं. जदयू जाति और वर्ग विशेष को ध्यान में रखकर जो सम्मेलन आयोजित […]
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पटना : जदयू को मजबूत करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं हैं. वह पार्टी के अंदर संगठन भी खड़ा कर रहे हैं और उसे चुनावी रंग में भी ढाल रहे हैं.
जदयू जाति और वर्ग विशेष को ध्यान में रखकर जो सम्मेलन आयोजित कर रहा है, वह मुख्यमंत्री की इसी रणनीति का हिस्सा है. नीतीश कुमार ने इस महीने अब तक तीन बड़े सम्मेलनों के जरिये बिहार की बहुसंख्यक आबादी की नब्ज टटाेलने की कोशिश की है.
बीते तीन अक्टूबर को दलित-महादलित सम्मेलन, सात को जदयू समाज सुधार वाहिनी का सामाजिक चेतना महासम्मेलन और 11 अक्तूबर को विराट छात्र संगम में मुख्यमंत्री ने जो कहा उसका सीधा संदेश गया है कि पिछड़े और दबे-कुचलों की उनको चिंता है. इसी कारण सरकार की योजनाओं में यह वर्ग पहली जगह पाता है.
बिहार में वोट भी इसी वर्ग का सबसे अधिक है. इसी कारण से वह आरसीपी सिंह जैसे कद्दावर नेता के नेतृत्व में जदयू के जागरूकता और प्रचार रथ को पूरे प्रदेश में घुमवा रहे हैं. राज्य सरकार ने बिहार के लोगों के लिए जो विशेष काम किये हैं, वर्ग-जाति विशेष के लिए जो योजनाएं शुरू की गयी हैं, उनकी जानकारी लोगों को घर-घर तक दी जा रही है. पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा लाखों की संख्या में छपवाये गये ब्रसर आदि को गांव-गांव में वितरित करा रहे हैं.
पार्टी कार्यालय में जो भी पहुंच रहा है उसे पिछड़ा वर्ग कल्याण, अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकास, बिहार में प्रशासनिक सुधार के आयाम, अल्पसंख्यक कल्याण एवं विकास, समाज सुधार के क्षेत्र में नयी पहल, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण एवं विकास, महिला सशक्तीकरण की योजनाओं के पर्चा देकर प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी जा रही है.
अपने सम्मेलनों पर खुफिया नजर रख रहा हाईकमान
जदयू प्रदेश भर में सम्मेलन, सभाएं और बैठकों का आयोजन कर रहा है. जदयू और उनके अनुसांगिक संगठन के पदाधिकारी विभिन्न कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहे हैं. सम्मेलन या सभाएं कितनी सफल हुईं.
उसमें कितने लोगों ने भाग लिया. कितने लोगों को शामिल होने का लक्ष्य था, इसकी उच्च स्तर पर रिपोर्ट ली जा रही है. सिर्फ आयोजनकर्ताओं की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा रहा है. एक खास व्यक्ति को अपने स्तर से जानकारी जुटाने के बाद उच्च स्तर पर रिपोर्ट दी जा रही है. किस कार्यक्रम में कितनी भीड़ का लक्ष्य था और हकीकत में वहां जुटी कितनी. जदयू के कार्यक्रम में जिलावार भीड़ का ग्राफ भी तैयार किया जा रहा है.
चुनाव नजदीक है तो अपने लोगों को संगठित करना, मजबूत करना, आॅर्गनाइज करना हर चुनाव से पहले नेता करते हैं. संगठन के भीतर संगठन, सामुदायिक संगठन, इन सभी की अलग-अलग मीटिंग होने से उन संगठन और समुदायों को लगाता है कि उनकी भी अलग से खास तौर से पहचान है. नेतृत्व की तरफ से उनका भी ध्यान रखा जा रहा है, यह संदेश जाता है.
—सुरेंद्र किशोर, वरिष्ठ पत्रकार
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