2032 तक भारत में 10 गुना बढ़ेगी ईवी बैटरी की डिमांड, रिपोर्ट में बड़ा अनुमान

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 14 May 2026 6:49 PM

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2032 तक भारत में ईवी बैटरी की डिमांड में 10 गुना उछाल का अनुमान / सिम्बॉलिक पिक X से

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार तेजी से बढ़ रहा है. नई रिपोर्ट के अनुसार 2032 तक ईवी बैटरी की मांग 200 गीगावॉट-घंटा पहुंच सकती है, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में बड़े अवसर बनेंगे.

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भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बाजार अब सिर्फ शुरुआती दौर में नहीं है, बल्कि यह तेजी से बड़े औद्योगिक बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. आने वाले वर्षों में देश में ईवी बैटरी की डिमांड में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. उद्योग संगठन इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2032 तक भारत में ईवी बैटरी की मांग करीब 10 गुना बढ़कर 200 गीगावॉट-घंटा तक पहुंच सकती है. फिलहाल 2025 में यह मांग लगभग 20 गीगावॉट-घंटा के आसपास बताई गई है. यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर आने वाले समय में बड़े इलेक्ट्रिक ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ बढ़ रहा है.

सिर्फ ईवी नहीं, पूरी सप्लाई चेन में बड़ा मौका

आईईएसए ने अपनी स्टडी में कहा है कि भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर केवल इलेक्ट्रिक वाहन बेचने में नहीं, बल्कि बैटरी, मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कलपुर्जों के लोकल मैन्युफैक्चरिंग में है. अगर भारत सप्लाई चेन को मजबूत करने में सफल होता है, तो देश ग्लोबल ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ईवी सेक्टर अब नीति आधारित शुरुआती चरण से निकलकर एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम का रूप ले चुका है. इसमें बैटरी निर्माण से लेकर चार्जिंग टेक्नोलॉजी और कंपोनेंट सप्लाई तक कई नए अवसर बन रहे हैं.

दोपहिया ईवी अभी आगे, लेकिन कारों की डिमांड बढ़ाएगी रफ्तार

रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल भारतीय ईवी बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की है. वर्ष 2025 में देश में 25 लाख से ज्यादा ईवी यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जिनमें लगभग 15 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और करीब 7 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स शामिल रहे.

हालांकि आने वाले वर्षों में पैसेंजर व्हीकल्स और हल्के कमर्शियल वाहनों की डिमांड तेजी से बढ़ सकती है. माना जा रहा है कि फैमिली कार सेगमेंट और डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने से बैटरी की जरूरत कई गुना बढ़ जाएगी.

लोकल बैटरी निर्माण पर रहेगा पूरा फोकस

आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन के अनुसार, भारत का ईवी बाजार बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है और 2032 तक बैटरी डिमांड में 10 गुना उछाल देखने को मिल सकता है. उन्होंने कहा कि इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए देश को लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, नई बैटरी टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई नेटवर्क पर तेजी से काम करना होगा.

सरकार भी पहले से पीएलआई स्कीम और लोकल सेल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर काम कर रही है. ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत में बैटरी प्लांट्स और ईवी कंपोनेंट इंडस्ट्री में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं.

भारत बन सकता है ग्लोबल ईवी हब

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत समय रहते बैटरी निर्माण और रॉ मटेरियल सप्लाई चेन को मजबूत कर लेता है, तो वह केवल घरेलू बाजार ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी बड़ा एक्सपोर्ट सेंटर बन सकता है. चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही कई वैश्विक कंपनियां भारत को नए विकल्प के रूप में देख रही हैं.

आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. यही वजह है कि अब ऑटो कंपनियों से लेकर बैटरी मैन्युफैक्चरर्स तक, सभी भारत को भविष्य के बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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