निजी स्कूलों की फीस मामला : कानून नहीं बना तो बंद नहीं होगी मनमानी
Updated at : 05 Oct 2018 8:27 AM (IST)
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कानून बनाने को लेकर चल रही है कवायद पटना : प्राइवेट स्कूलों की मनमानी व फीस नियंत्रण के लिए राज्य में अब तक कानून नहीं बन सका है. हालांकि पिछले करीब दो साल से इसको लेकर कवायद चल रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से कानून का प्रारूप तैयार कर विधि […]
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कानून बनाने को लेकर चल रही है कवायद
पटना : प्राइवेट स्कूलों की मनमानी व फीस नियंत्रण के लिए राज्य में अब तक कानून नहीं बन सका है. हालांकि पिछले करीब दो साल से इसको लेकर कवायद चल रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से कानून का प्रारूप तैयार कर विधि विभाग के पास भेजा गया था, लेकिन उसके बाद से फाइल विभाग में ही सिमट कर रह गयी है.
हाईकोर्ट ने 2017 में ही दिया था निर्देश : स्कूलों की हर साल बढ़ती फीस व मनमानी पर नियंत्रण के लिए पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 के आरंभ में ही विभाग को निर्देश दिया था. इस पर विभाग के तत्कालीन अपर सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था. तब से कानून तैयार कर लागू करने की कवायद चल रही है. यदि आगामी सत्र से पहले कानून लागू नहीं होता है, तो स्कूलों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगेगा और अभिभावकों की जेब पर खर्च फिर बढ़ेगा.
पिछले जुलाई महीने में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को पुन: समय देते हुए छह सप्ताह में जवाब देने को कहा था, लेकिन विभाग की ओर से अब तक जवाब नहीं दिया गया है. जानकारी के अनुसार विभाग ने विभिन्न राज्यों में प्राइवेट स्कूलों के संचालन का अध्ययन करने के पश्चात कानून का प्रारूप तैयार किया है.
शिक्षकों के मामले में उलझा विभाग : जानकारी के अनुसार हाल की महीनों में शिक्षा विभाग नियोजित शिक्षकों के समान काम- समान वेतन मामले में उलझा रहा. इस कारण प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने की योजना प्रभावी नहीं हो सकी है. हालांकि बताया जाता है कि नये सत्र से पहले कानून लागू होने की पूरी संभावना है.
कानून लागू होने की उम्मीद : अभिभावक संजीव कुमार, ब्रजेश व अन्य ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है. न्यायालय राज्य में यह एक कानून लागू कराने को लेकर लगातार प्रयासरत है. नये सत्र से पहले राज्य में स्कूलों को लेकर कानून लागू होने की संभावना है, लेकिन शिक्षा विभाग का जो रवैया है उससे थोड़ा संशय दिख रहा है. यदि नये सत्र से पहले यह कानून लागू नहीं हुआ तो एक बार फिर अभिभावकों को फीस वृद्धि की मार झेलनी पड़ सकती है.
आरटीई : इस साल भी नहीं भरीं कोटे की सीटें!
पटना : निजी स्कूलों में इस वर्ष भी शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत कोटे की शत-प्रतिशत सीटों पर नामांकन नहीं हो सका है. जबकि इस वर्ष शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने का लक्ष्य था.
जानकारी के अनुसार इस वर्ष विभिन्न स्कूलों में कोटे की सीटों पर करीब 3000 बच्चों का नामांकन हुआ है. पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या सर्वाधिक है, लेकिन जिले में स्थित 371 मान्यता प्राप्त स्कूलों में कोटे की सीटों की कुल संख्या लगभग 3507 थी. हालांकि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ)-एसएसए कार्यालय का मानना है लगभग सभी सीटों पर नामांकन हो चुका है.
15 हजार से अधिक आवेदन आये थे : जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थित मान्यता प्राप्त स्कूलों में कोटे की सीटों पर नामांकन के लिए कुल 15 हजार 157 आवेदन आये थे. बावजूद लॉटरी के माध्यम से घोषित प्रथम सूची के आधार पर करीब 900 नामांकन ही हुए. उसके बाद पुन: लॉटरी निकाली गयी.
जानकारी के अनुसार कई स्कूलों द्वारा नामांकन में आनाकानी की गयी, जिस पर डीपीओ-एसएस कार्यालय ने सख्ती दिखाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किये. वहीं कई अभिभावकों ने घर से स्कूल की दूरी अधिक होने के कारण अपने बच्चों का नामांकन नहीं कराया. हालांकि अभिभावकों से च्वाइस लेकर भी विद्यालय का आवंटन किया गया, लेकिन स्कूलों की आनाकानी व नकारात्मक रवैये के कारण नामांकन प्रभावित हुआ है.
कोटे की सीट पर नामांकन लेना नहीं चाहते स्कूल : बताया जाता है कि सत्र के आरंभ में कोई भी स्कूल कोटे की सीटों पर नामांकन नहीं लेना चाहता. लेकिन बाद में विभागीय दबाव के कारण स्कूल नामांकन करते हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. जबकि आरटीई के प्रावधानों के तहत स्कूलों को कोटे की सीटों पर नामांकन सुनिश्चित करना होता है.
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