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पटना : बायोटेक्नोलॉजी का अब तक नहीं बन पाया स्वतंत्र डिपार्टमेंट

Updated at : 03 Oct 2018 6:38 AM (IST)
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पटना : बायोटेक्नोलॉजी का अब तक नहीं बन पाया स्वतंत्र डिपार्टमेंट

अनुराग प्रधान बदहाली. बिहार में लाइफ साइंस से जुड़े विषयों से डिग्री लेने वाले परेशान पटना : बिहार में लाइफ साइंस से जुड़े विषयों से डिग्री हासिल करने वाले लोग काफी परेशान हैं. इन लोगों को बॉटनी और जूलॉजी के शिक्षक ही पढ़ाते हैं. बॉटनी और जूलॉजी के एलाइड सब्जेक्ट बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान […]

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अनुराग प्रधान
बदहाली. बिहार में लाइफ साइंस से जुड़े विषयों से डिग्री लेने वाले परेशान
पटना : बिहार में लाइफ साइंस से जुड़े विषयों से डिग्री हासिल करने वाले लोग काफी परेशान हैं. इन लोगों को बॉटनी और जूलॉजी के शिक्षक ही पढ़ाते हैं. बॉटनी और जूलॉजी के एलाइड सब्जेक्ट बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान आदि विषयों की पढ़ाई में केवल खेल हो रहा है. इसके लिए अलग से शिक्षक बहाल नहीं किये जा रहे हैं.
लाइफ साइंस के स्टूडेंट को समान शिक्षा मिलने के बाद भी बिहार में समान अवसर नहीं हैं. इन विषयों से डिग्री हासिल करने वाले स्टूडेंट को असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली में कोर्ट ने बॉटनी और जूलॉजी शिक्षकों के 315 पदों में से 90% पदों पर बहाली के लिए कहा है.
बाकी की 10% सीटों पर बॉटनी और जूलॉजी के समतुल्य विषयों में पीजी या पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों को मौका देने को कहा है. अब ये स्टूडेंट्स बायोटेक्नोलॉजी के साथ लाइफ साइंस से संबंधित अन्य विषयों के डिपार्टमेंट अलग से खोलने की मांग कर रहे हैं.
कोर्स करने के बाद भी प्रोफेसर बनने का कोई स्कोप नहीं
स्टूडेंट्स कहते हैं कि अगर लाइफ साइंस से जुड़े विषयों के लिए स्वतंत्र विभाग नहीं लाया गया, तो आखिर किस आधार पर लाइफ साइंस की पढ़ाई वोकेशनल कोर्स के रूप में चल रही है. कोर्स करने के बाद भी स्टूडेंट्स को प्रोफेसर बनने का कोई स्कोप नहीं दिख रहा है.
लाइफ साइंस से पढ़ाई करने वाले जितेंद्र कहते हैं कि देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रीय यूनिवर्सिटियों, आईआईटी में जीव विज्ञान के समतुल्य विषयों के अभ्यर्थियों को समान अवसर दिया जा रहा है. आज के दौर में बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री जैसे विषय महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इन्हें डेवलप करने के लिए सरकारें अलग से प्रयास कर रही हैं. बिहार में बॉटनी एवं जूलॉजी के शिक्षक ही समतुल्य विषयों को पढ़ा रहे हैं. जब ये अभ्यर्थी बॉटनी एवं जूलॉजी में आयोग्य हैं, तो फिर बॉटनी एवं जूलॉजी के शिक्षक कैसे यह कोर्स चलाते हैं.
बॉटनी और जूलॉजी विषयों के लिए कई ऐसे अभ्यर्थियों ने असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया था, जो बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान आदि विषयों से पीजी या पीएचडी कर चुके हैं.
बीपीएससी ने इनके आवेदन को यह कह कर खारिज कर दिया था कि इनकी पीजी या पीएचडी बॉटनी या जूलॉजी विषय में नहीं है. इस कारण कई आवेदकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. कोर्ट के फैसले के मुताबिक अभ्यर्थियों को बॉटनी एवं जूलॉजी में सिर्फ 10 प्रतिशत कोटा समतुल्य विषयों के लिए दिया जाये.
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