पटना : हर साल सड़क पर 16 हजार नये चारपहिया वाहन, पार्किंग क्षमता 1600 भी नहीं बढ़ी
Updated at : 17 Sep 2018 5:32 AM (IST)
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पटना : पटना जिला परिवहन कार्यालय में इस समय 13 लाख वाहन पंजीकृत हैं. इसमें तीन लाख कार और जीप जैसे हल्के चारपहिया वाहन हैं. पटना में हर महीने औसतन 1400 (800 से 2000 के बीच) चारपहिया वाहन बिकते हैं. पिछले एक वर्ष में 16 हजार से अधिक चारपहिया वाहन शहर की सड़कों पर उतर […]
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पटना : पटना जिला परिवहन कार्यालय में इस समय 13 लाख वाहन पंजीकृत हैं. इसमें तीन लाख कार और जीप जैसे हल्के चारपहिया वाहन हैं. पटना में हर महीने औसतन 1400 (800 से 2000 के बीच) चारपहिया वाहन बिकते हैं.
पिछले एक वर्ष में 16 हजार से अधिक चारपहिया वाहन शहर की सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन पूरे साल के दौरान 1600 वाहनों की क्षमता वाले नये पार्किंग का निर्माण भी नहीं हुआ. पुराने पार्किंग की क्षमता भी देखें तो जरूरत की तुलना में यह महज पांच फीसदी ही है. ऐसे में पार्किंग की समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है.
तीन लाख वाहनों के लिए नगर निगम के केवल 52 पार्किंग : पटना शहर में चलने वाले चारपहिया वाहनों के लिए नगर निगम ने अब तक केवल 52 पार्किंग बनाये हैं. इन पार्किंगों में ज्यादातर की अधिकतम क्षमता 100 चारपहिया वाहनों से कम की है और कुल क्षमता 5 हजार चारपहिया वाहनों की पार्किंग से अधिक नहीं जबकि चारपहिया वाहनों की संख्या तीन लाख को पार कर चुकी है.
नर्सिंग होम बना लिया पर पार्किंग नहीं : शहर के ज्यादातर नर्सिंग होम ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी जमीन के एक-एक इंच पर बहुमंजिला भवन खड़ा कर लिया है, लेकिन पार्किंग के लिए थोड़ी भी जगह नहीं छोड़ी है.
परिणाम है कि हर दिन वहां आने वाले सैकड़ों मरीजों के वाहन सामने की सड़क या उसके किनारे लगे होते हैं, जिससे आने-जाने में लोगों को परेशानी होती है और जाम लगता है. राजेंद्र नगर, डॉक्टर्स कॉलोनी, कंकड़बाग व नाला रोड में यह समस्या सबसे अधिक दिखती है.
शिक्षण संस्थान के सामने सड़क पर खड़े रहते हैं वाहन
बोरिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड, अशोक राजपथ, खजांची रोड, सगुना मोड़ दानापुर रोड में मुख्य सड़क के किनारे अंग्रेजी माध्यम के कई बड़े स्कूल और कोचिंग संस्थान हैं, जहां पढ़ने के लिए हर दिन सैंकड़ों छात्र बसें, पिकअप वाहन व कार-जीप जैसे निजी वाहनों से आते हैं, लेकिन शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन ने पार्किंग के लिए बिल्कुल जगह नहीं छोड़ी है. ऐसे में वहां आने वाले वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं, जिससे जाम लगता है.
हर साल सड़क पर आ रही 84 हजार बाइक
बाइक के बिक्री की रफ्तार कार, जीप जैसे हल्के चारपहिया वाहन से कई गुुना अधिक है. वर्तमान में आठ लाख बाइक पंजीकृत हैं और साल में 84 हजार नये बाइक सड़क पर आ-जा रहे हैं. लेकिन इनके पार्किंग की व्यवस्था भी समान रूप से लचर है. मजबूरन लोगों को सड़क पर बाइक लगानी पड़ती है, जिससे जाम लगता है और परेशानी होती है.
शहर की 16 सड़कों पर पार्किंग के लिए जगह नहीं
शहर की 16 सड़क ऐसी हैं, जहां पार्किंग के लिए जगह नहीं है. इनमें नाला रोड, कदमकुआं जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां बड़े बाजार स्थित हैं. इनमें खरीदारी के लिए हर दिन हजारों लोग चारपहिया वाहनों से आते हैं.
पार्किंग नहीं होने के कारण सड़क पर वाहन लगाना इनकी मजबूरी है. इसके कारण सड़कों की चौड़ाई घट जाती है, जिससे आने-जाने में परेशानी होती है और बार-बार जाम लगता है. समस्या के निदान के लिए पिछले वर्ष पथ निर्माण विभाग की तरफ से लकीर खींच कर इन क्षेत्रों में सड़क पर ही पार्किंग स्थल चिन्हित कर दिये गये थे. लेकिन 10 सितंबर को हाईकोर्ट के द्वारा ऐसे सभी पार्किंग को अवैध करार देने से समस्या और भी बढ़ गयी है.
15 हजार चारपहिया वाहनों की ही पार्किंग क्षमता
500 वाहनों की क्षमता वाले बुद्धा पार्क मल्टी लेवल पार्किंग, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों की पार्किंग, सरकारी अस्पताल, दफ्तर और अन्य सरकारी पार्किंग की क्षमता को जोड़ लें तो अधिकतम 10 हजार वाहनों को पार्क करने में शहर की सरकारी पार्किंग सक्षम हैं. प्राइवेट पार्किंग क्षमता को भी मिला लें तो शहर में अधिकतम 15 हजार चारपहिया वाहनों के पार्किंग की क्षमता है, जो कुल जरूरत(तीन लाख चारपहिया वाहन) की महज पांच फीसदी है.
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