पेपरलेस होगी बिहार पुलिस, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा हर काम
Updated at : 23 Aug 2018 8:05 AM (IST)
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टाटा कंसल्टेंसी को दिया गया काम का जिम्मा, 55 सप्ताहों में पूरा करना है काम, सभी थाने जुड़ेंगे एक-दूसरे से पटना : डिजिटल क्रांति का प्रभाव जल्दी ही पुलिस विभाग पर भी देखने को मिलेगा. बिहार पुलिस को ‘पेपरलेस’ करने की कवायद शुरू हो गयी है. काफी जद्दोजहद के बाद काम करने वाली एजेंसी का […]
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टाटा कंसल्टेंसी को दिया गया काम का जिम्मा, 55 सप्ताहों में पूरा करना है काम, सभी थाने जुड़ेंगे एक-दूसरे से
पटना : डिजिटल क्रांति का प्रभाव जल्दी ही पुलिस विभाग पर भी देखने को मिलेगा. बिहार पुलिस को ‘पेपरलेस’ करने की कवायद शुरू हो गयी है. काफी जद्दोजहद के बाद काम करने वाली एजेंसी का चयन भी हो गया है.
टाटा कंसल्टेंसी को जिम्मेदारी दी गयी है. सभी थानों को जिला, फिर राज्य मुख्यालय से जोड़ा जायेगा. इसका मकसद इतना है कि सभी थाने हर तरह की सूचना ऑनलाइन अपलोड करेंगे. इससे संबंधित कोई अन्य विभाग अगर किसी मामले को लेकर कोई छानबीन करना चाहते हैं, तो वह अपने कार्यालय में बैठे-बैठे कर पायेंगे.
काम पूरा होते ही मैनुअल काम बंद हो जायेगा. एफआईआर से लेकर किसी भी मसले पर रिपोर्ट लगाने तक की कार्रवाई ऑनलाइन किया जायेगा. संबंधित व्यक्ति अपने काम की ट्रैकिंग भी कर पायेगा. खास बात यह है कि इसके तहत सबसे अधिक काम थानों के जिम्मे है. सभी थानों को इस बाबत निर्देश जारी किया जा चुका है. पुलिस मुख्यालय के सूत्रों की मानें, तो थानों के लिए सात तरह के फाॅर्म तय किये गये हैं.
थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कवायद वर्ष 2009 में शुरू हुई थी. केंद्र सरकार ने योजना बनायी कि देश भर के थानों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा जाये. बिहार में वर्ष 2012 में सरकार ने इसको लेकर काम शुरू किया.
भागलपुर और पटना में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में डिजिटल प्लेटफाॅर्म तैयार भी किया गया. सूत्रों की मानें तो उस समय वयमटेक का चुनाव काम के लिए किया गया था, परंतु कुछ कारणों से इसका कांट्रैक्ट रद्द कर दिया गया थ. वर्ष 2015 से फिर खोज शुरू हुई.
10 अगस्त को हुई थी स्टेट एपेक्स कमेटी की बैठक
मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में 10 अगस्त को स्टेट एपेक्स कमेटी की बैठक हुई थी. इसमें टीसीएस के साथ कांट्रैक्ट साइन करने को लेकर विमर्श हुआ. हरी झंडी मिलने के बाद जल्दी ही काम शुरू होने की उम्मीद है. सबकुछ ठीक-ठाक रहा, तो 55 सप्ताह में एजेंसी को काम पूरा करना होगा. पांच साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम भी एजेंसी को ही करनी होगी. इसके पूरा होते ही कोर्ट, पुलिस, जेल व अन्य संबंधित विभाग एक-दूसरे से जुड़ जायेंगे. सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा. पिछले 10 साल की एफआईआर का रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का काम तेजी से चल रहा है.
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