नाबालिग छात्रा से अप्राकृतिक यौनाचार मामले, संत जेवियर स्कूल की 1 शिक्षिका को 10 व दूसरी को 7 साल की सजा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Jul 2018 7:28 AM

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पटना : संत जेवियर स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ अप्राकृतिक यौनाचार मामले में पॉक्सो विशेष जज रविंद्र नाथ त्रिपाठी की अदालत ने शिक्षिका नूतन जोसेफ को 10 तथा इंदु आनंद 7 साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी. वर्ष 2016 में दोनों शिक्षिकाओं द्वारा अपने ही स्कूल की एलकेजी की एक छात्रा के साथ अप्राकृतिक […]

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पटना : संत जेवियर स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ अप्राकृतिक यौनाचार मामले में पॉक्सो विशेष जज रविंद्र नाथ त्रिपाठी की अदालत ने शिक्षिका नूतन जोसेफ को 10 तथा इंदु आनंद 7 साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी.
वर्ष 2016 में दोनों शिक्षिकाओं द्वारा अपने ही स्कूल की एलकेजी की एक छात्रा के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किये जाने का मामला प्रकाश में आया था. मामले में अभियुक्त नूतन जोसफ को अदालत ने आईपीसी की धारा 377 एवं 34 में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी है.
जबकि पॉक्सो की धारा 4 में 7 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा पॉक्सो की ही धारा 6 में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. राशि जमा नहीं करने पर अभियुक्त को तीन माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी.
वहीं दूसरी अभियुक्त इंदु आनंद को अदालत ने आईपीसी की धारा 377 एवं 34 में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. साथ ही पास्को की धारा 4 के अंतर्गत 7 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
पॉक्सो विशेष जज की अदालत ने सुनायी कड़ी सजा, अर्थदंड भी लगाया
2016 में दर्ज हुआ था मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में पीड़िता की मां ने दोनों अभियुक्त नूतन जोसफ व इंदु आनंद के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया था. मामले में बताया गया था कि दोनों अभियुक्त क्लास ओवर होने के बाद शौच के बहाने पीड़िता को क्लास रूम के पिछले कमरे में ले जाती थीं.
वहां दोनों पीड़िता के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया करती थीं. पीड़िता की मां ने यह भी आरोप लगाया था कि विगत 27 अक्तूबर, 2016 को जब पीड़िता स्कूल से घर वापस आयी, तो उसे बैठने और चलने में कठिनाई हो रही थी, जिसे देखकर उन्हें (पीड़िता की मां) शक हुआ. उन्होंने पीड़िता से पूछा तो उसने ने दोनों अभियुक्तों के द्वारा किये जानेवाले कुकर्म के बारे में बताया.
12 जुलाई को दोषी करार
3 अक्तूबर, 2016 को पीड़िता की मां ने महिला थाने में जाकर दोनों अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. अनुसंधान के क्रम में सूचक द्वारा लगाये गये आरोप को सत्य पाते हुए अनुसंधानकर्ता ने पॉक्सो की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की. मामले में पीड़िता की तरफ से पीड़िता समेत 7 गवाहों की गवाही हुई. वहीं अभियुक्तों की तरफ से दो गवाहों की गवाही हुई. पीड़िता और गवाहों को सुनने के पश्चात विशेष जज ने अभियुक्तों पर लगाये गये आरोप को सत्य पाया व गत 12 जुलाई, 2018 को दोनों को दोषी करार दिया था.
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