इन 10 बड़े कारणों से हुई बिहार कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी की विदाई, पार्टी को दे सकते हैं बड़ा झटका

Updated at : 27 Sep 2017 12:04 PM (IST)
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इन 10 बड़े कारणों से हुई बिहार कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी की विदाई, पार्टी को दे सकते हैं बड़ा झटका

पटना : बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद से बिहार प्रदेश कांग्रेस के अंदर अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलबाजियों का शोर थम गया है. मंगलवार को देर शाम बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक चौधरी को हटा दिया गया. पार्टी में बिहार के प्रभारी महासचिव सीपी जोशी ने एक पत्र जारी कर […]

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पटना : बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद से बिहार प्रदेश कांग्रेस के अंदर अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलबाजियों का शोर थम गया है. मंगलवार को देर शाम बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक चौधरी को हटा दिया गया. पार्टी में बिहार के प्रभारी महासचिव सीपी जोशी ने एक पत्र जारी कर यह सूचना जारी कर दिया कि पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कौकब कादरी नये पीसीसी प्रमुख की नियुक्ति नहीं होने तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे. सवाल यह है कि वह कौन से प्रमुख कारण रहे जिसकी वजह से अशोक चौधरी की विदाई तय हुई और वह बिहार में कांग्रेस को किस तरह से झटका दे सकते हैं.

पहला कारण – महागठबंधन की सरकार बनने के बाद डॉ. अशोक चौधरी को नीतीश कुमार ने मनचाहे विभाग का मंत्री बनाया. अशोक चौधरी सरकार में रहते हुए नीतीश कुमार के काफी करीब हो गये. उन्होंने नीतीश के साथ यूपी चुनाव में बनारस की यात्रा की, साथ में सेल्फी खिंचाई और कई मौकों पर जदयू का खुलकर पक्ष लिया.

दूसरा कारण- महागठबंधन टूटने के बाद भी अशोक चौधरी ने जदयू के पक्ष में खुलकर बयान दिया और पार्टी में टूट की संभावनाओं से इनकार करते रहे, उधर अशोक विरोधी कांग्रेस नेता आलाकमान को यह समझाने में कामयाब हो गये कि अशोक चौधरी पार्टी के कई विधायकों के साथ जदयू के संपर्क में बने हुए हैं.

तीसरा कारण- भाजपा के साथ सत्ता में साझेदारी करने के बाद भी अशोक चौधरी ने भागलपुर में नहर का बांध टूटने पर यह बयान दिया कि इसमें मंत्री का कोई दोष नहीं है. इस बयान ने कांग्रेस के अशोक विरोधी नेताओं को एक हथियार दे दिया और उन्होंने इसकी तत्काल सूचना दिल्ली को दे दी.

चौथा कारण – भाजपा के साथ सरकार बनने के बाद बिहार सरकार की ओर से सभी पूर्व मंत्रियों को बांग्ला खाली करने का नोटिस थमाया गया, लेकिन नीतीश सरकार की ओर से अशोक चौधरी के बंगले को खाली कराने की पहल नहीं की गयी. इससे यह साफ संदेश गया कि अशोक चौधरी पूरी तरह जदयू के साथ खड़े हैं.

पांचवा कारण- हाल के दिनों में बिहार प्रदेश कांग्रेस में टूट की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक चौधरी दिल्ली नेतृत्व के बारे में कुछ ज्यादा ही बोल गये. एक क्षेत्रीय चैनल के साथ बातचीत में वह रो पड़े और कहा कि 99 फीसदी नंबर लाने वाले बच्चे की भी पिटायी हो रही है.

छठा कारण- अशोक चौधरी ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के सामने इमोशनल कार्ड खेलना शुरू किया और कहा कि आलाकमान जल्द फैसला करे कि उन्हें हटाना है या रखना है. अशोक चौधरी के इस बड़बोलेपन ने कांग्रेस नेतृत्व को गलत संदेश दिया और आखिरकार उन्हें पद से हटा दिया गया.

सातंवा कारण – केंद्रीय नेतृत्व को यह आशंका थी कि पार्टी की राज्य इकाई दो फाड़ हो सकती है जिसमें से एक धड़े की अगुवाई चौधरी कर सकते हैं. चौधरी ने हाल में आरोप लगाया था कि एक वर्ग पार्टी की बिहार इकाई में बगावत को हवा देने के लिए उनका नाम लेकर उनकी छवि खराब कर रहा है.

आठवां कारण- कांग्रेस के अशोक विरोधी नेताओं ने दिल्ली में फीडबैक दिया कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 27 विधायक हैं. बिहार में जदयू के महागठबंधन से हटने के बाद इस बात को लेकर आशंका है कि अशोक चौधरी के नेतृत्व में कुछ विधायक जदयू में शामिल हो सकते हैं. हालांकि कांग्रेस ने दावा किया था कि उसने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया है.

9वांकारण – पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले माह 20 से अधिक विधायकों से मुलाकात कर पार्टी के कामकाज के बारे में उनकी अलग अलग राय जानी थी. पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल ने कांग्रेस विधायकों को बुलाकर इसलिए बातचीत की थी ताकि पार्टी की राज्य इकाई में विभाजन को टाला जा सके. उस बातचीत में अशोक विरोधी विधायकों ने अध्यक्ष के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़ा किया था.

10वांकारण- सबसे अंतिम और बड़ा कारण है, हाल के दिनों में राजद सुप्रीमो लालू से अशोक चौधरी की बढ़ी दूरी. महागठबंधन टूटने के बाद अशोक चौधरी एकाएक नीतीश कुमार के काफी करीब हो गये और लालू से दूरी बना ली. बताया जा रहा है कि लालू ने भी अशोक चौधरी की शिकायत सोनिया गांधी से की थी.

बिहार में कांग्रेस की राजनीति को करीब से जानने वालों का कहना है कि जिस तरह से अशोक चौधरी ने मीडिया के सामने राहुल गांधी पर वार किया है, उससे साफ लगता है कि अशोक चौधरी कांग्रेस में दलितों के प्रताड़ित होने वाला कार्ड खेल सकते हैं. इस्तीफे के बाद अशोक चौधरी मीडिया की सुर्खियां बने रहेंगे और पार्टी को अंदर ही अंदर काफी नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं. अशोक चौधरी की दूसरी पार्टी में जाने का रास्ता साफ हो जायेगा और वह अपने समर्थकों के साथ किसी और पार्टी का दामन थाम लेंगे. जाने से पहले अशोक चौधरी कांग्रेस के भीतर पूरी तरह खलबली मचाकर जाने की फिराक में हैं. अच्छे वक्ता और नेतृत्वकर्ता के रूप में पहचान बना चुके अशोक चौधरी को अन्य पार्टियां दिल खोलकर स्वागत करेंगी और पार्टी में बेहतर पद भी दे सकती हैं. अशोक चौधरी के संपर्क में रहने वाले बिहार के 27 विधायकों में से 18 से ज्यादा विधायक समर्थन में हैं, इसलिए अशोक चौधरी बिहार प्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका भी दे सकते हैं.

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