छात्राओं व शिक्षिकाओं को झेलनी पड़ती है फजीहत
Updated at : 31 Jul 2019 9:13 AM (IST)
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रोह : प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शौचालय की स्थिति अच्छी नहीं है. लिहाजा विद्यार्थी खुले में शौच जाने को विवश हैं. इसका मूल कारण शौचालय का गंदा रहना बताया जाता है. कहने को तो लगभग सभी विद्यालयों में शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है. अगर किसी विद्यालय में शौचालय की कमी […]
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रोह : प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शौचालय की स्थिति अच्छी नहीं है. लिहाजा विद्यार्थी खुले में शौच जाने को विवश हैं. इसका मूल कारण शौचालय का गंदा रहना बताया जाता है. कहने को तो लगभग सभी विद्यालयों में शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है. अगर किसी विद्यालय में शौचालय की कमी है तो वहां नया शौचालय बनवाया गया.
लेकिन, नियमित रूप से शौचालय की साफ-सफाई नहीं होती है. नतीजा छात्र-छात्राओं को मलमूत्र त्यागने के लिए खुले स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है. छोटे बच्चे तो खुले स्थानों में चले जाते हैं. मगर बड़ी उम्र की छात्राओं को फजीहत झेलनी पड़ती है.
इस परिस्थिति में पढ़ाई बीच में छोड़ कर उसे अपने घरों की ओर रवाना होना पड़ता है. इस प्रकार शौचालय की अव्यवस्था के कारण स्वच्छ भारत मिशन की कवायद को धक्का लग रहा है.
शौचालय में नहीं है पानी का इंतजाम
सरकारी विद्यालयों में बनवाये गये अधिकतर शौचालयों में पानी का इंतजाम नहीं है. इससे छात्र-छात्राओं को काफी असुविधा होती है. शौचालय से चापाकल की दूरी अधिक रहने के कारण बच्चे लोटा अथवा डिब्बा में पानी लेकर जाने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं.
ऐसे हालात में वे शौच त्यागने की बारी आने पर सीधे घर की ओर रवाना होना बेहतर मानते हैं. छात्र-छात्राओं के ठहराव पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. पानी का इंतजाम नहीं रहने के कारण शौचालय की साफ-सफाई भी प्रभावित हो रही है.
शिक्षा समिति व ग्रामीण भी नहीं देते ध्यान
स्कूलों में शौचालय को दुरुस्त रखने के लिए कड़े कदम जरूर उठाने की जरूरत है. इसके लिए विद्यालय शिक्षा समिति के साथ ग्रामीणों को भी सक्रिय होने की आवश्यकता है. स्कूल के शौचालय को नुकसान पहुंचानेवाले तत्वों से ग्रामीण सख्ती से निबट सकते हैं. ताकि, शौचालय इस्तेमाल करने लायक रहे. अगर छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावक व विद्यालय शिक्षा समिति के लोग ध्यान दें तो शौचालय दुरुस्त रहेगा.
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