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नशे की लत छात्रों को बना रही मानसिक रोगी

Updated at : 02 Jun 2024 1:50 AM (IST)
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नशे की लत छात्रों को बना रही मानसिक रोगी

नशे की लत छात्रों को बना रही मानसिक रोगी

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कुमार दीपू, मुजफ्फरपुर स्कूली छात्र नशे की लत में मानसिक रोग से पीड़ित हो रहे हैं. हर माह 20-25 छात्र सदर अस्पताल के मानसिक ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे हैं. यह छात्र नौवीं और दसवीं के अलावा इंटर में पढ़ने वाले हैं. सदर अस्पताल के मानसिक ओपीडी में इन छात्रों का इलाज कर काउंसलिंग की जा रही है. सदर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवियांश कुमार बताते हैं कि हर प्रकार के नशे की लत से ग्रसित होना एक मनोरोग है. बीमारियों की तरह यह भी एक रोग है. इसके भी कई प्रकार के लक्षण होते हैं, जिनसे पता चल जाता है कि व्यक्ति की यह लत उसे रोगी बना चुकी है. कोई भी व्यक्ति नशा समूह के दबाव या स्वयं की उत्सुकता से शुरू करता है, लेकिन यही दबाव या उत्सुकता नशे की लत की ओर धकेल देती है. उन्होंने कहा कि समय के साथ नशे की शारीरिक एवं मानसिक निर्भरता बढ़ती जाती है. कोई भी नशीला पदार्थ शरीर में जाता है तो इसके परिणाम स्वरूप कई बदलाव होते हैं. इससे व्यक्ति को अलग अनुभूति होती है. ऐसा करते-करते वह शारीरिक व मानसिक रूप से नशे का आदी होता चला जाता है. छात्र नशे पर पूरी तरह से आश्रित हो जा रहे एक समय ऐसा जाता है कि व्यक्ति नशे पर पूरी तरह से आश्रित हो जाता है और वह उसके बिना नहीं रह सकता. इस स्थिति में उसको मानसिक समस्याएं होने लगती हैं और कई बार यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है. उन्होंने बताया कि नशे के कारण रोगियों के लिए अस्पताल के अंदर इलाज के साथ काउंसलिंग भी कराया जाता हैं. ऐसे होता है इलाज डॉक्टर के मुताबिक, विभिन्न प्रकार की दवाइयों से व्यक्ति के अंदर नशे की लत को खत्म किया जाता है. साथ ही विभिन्न मनोवैज्ञानिक विधियों से उसकी नशे के प्रति मानसिक निर्भरता को दूर किया जाता है. रोगी को भविष्य में नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है. रोगी ही नहीं उसके परिवारवालों व आसपास के समाज को भी जागरूक किया जाता है. नशे की लत वाले व्यक्ति के मानसिक रोगी बनने का लक्षण – शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान हो जाने के बाद भी इस तरह के नशे को करते रहना – नशीले पदार्थों को खरीदने के लिए चोरी जैसे काम भी करना – नशे में होने के बावजूद भी वाहन चलाना और अन्य गंभीर कार्य को करना – इसको छोड़ने के प्रयासों में विफल रहना – किसी भी प्रकार की दवाइयों का निश्चित समय की तुलना में लंबी अवधि तक दवा का सेवन करना

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