मां दुर्गा के नौ रूप समाज में सभी तरह की बुराइयों के खात्मे के साथ स्वच्छ व सुंदर समाज के निर्माण का संदेश देते हैं. नवरात्र के नौ दिनों तक भक्त मां की साधना से मनोकामना पूरी होने की कामना करते हैं. नौ दिनों तक मां की पूजा के साथ उनकाे खोइंछा देकर महिलाएं विदाई देती हैं. अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक यह त्योहार हमें समाज को एक सूत्र में बांधे रखने को प्रेरित करता है. देवताओं के तप-बल से अवतरित होकर मां ने असुरों का संहार किया था. आज भी समाज में कई आसुरी शक्तियां हैं, जो हमारे समाज को विखंडित कर रही हैं. महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंच रही है. ऐसे समय में महिलाएं जागृत हुई हैं. इस नवरात्र में कई महिलाओं ने यह संकल्प लिया है कि वे अपने अंदर सहित समाज की कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगी. यहां हम शहर की ऐसी ही नौ महिलाओं के संकल्प को साझा कर रहे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाली इन महिलाओं ने माना है कि मां दुर्गा की साधना के साथ हमें आज की आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की कोशिश करना चाहिए. प्रस्तुत हैं इनके विचार.
हिम्मत नहीं हारना, संघर्ष से बढ़ते चलना
समाज को बुराई से बचाने की जिम्मेदारी महिलाओं के ऊपर है. महिलाएं यदि दुर्गा के नौ रूपों की तरह अपने अंदर गुण धारण कर ले तो समाज से सारी कुरीतियां मिट जाएगी. मैं हमेशा नवरात्र में यही संकल्प लेती हूं कि मां मेरे आत्मविश्वास को बढाए, जिससे हर वह काम कर सकूं, जो निश्चय किया है. मैं अपना काम ईमानदारी से करती रही हूं. लाख मुश्किलें हो, लेकिन मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी. यह शक्ति मुझे मां दुर्गा से मिली है. मैं चाहती हूं कि समाज की सभी महिलाएं मुश्किलों से लड़ना सीखे. गलत का विरोध करे. लड़कियों को आत्मसंयम व आत्मबल से अपना मुकाम पाना चाहिए. महिलाएं जगेगी तो समाज जगेगा. समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा. दहेज, अशिक्षा व स्त्री सम्मान के लिए लड़कियां आगे बढ़े और ऐसे दानवों से मुकाबला करे तभी समाज का कल्याण संभव है.
पद्मश्री राजकुमारी देवी, किसान चाची
आलस्य का त्याग करने का लिया संकल्प
दशहरा का शाब्दिक अर्थ दस अवगुणों को हरना है. इस दशहरा पर मैंने यह संकल्प लिया है कि आलस्य का त्याग करूंगी. कई बार हम आज के काम को कल पर टालते हैं. इससे अंतिम समय में परेशानी हो जाती है. नवरात्र में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है. दुर्गा प्रकृति हैं. स्त्री का भी यही रूप है. मां राक्षसों का संहार कर हमें सभ्य जीवन का संस्कार देती हैं. माता की पूजा के मौके पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि प्रकृति की रक्षा करें. उसका दोहन नहीं करें. पौधे लगाएं. बुराइयों का त्याग करें व माता ने जिस धर्म का संस्कार दिया है, उस को मानते हुए जीवन जीएं. समाज में व्याप्त आसुरी शक्तियों से बचे व अच्छे समाज के निर्माण का संकल्प लें. हम सभी को इस नवरात्र में अपने अंदर की बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए. तभी समाज में व्याप्त कुरीतियां दूर होंगी और हमारा समाज अच्छा बनेगा.
डॉ ममता रानी, प्राचार्या, एमडीडीएम कॉलेज
बुराइयों को दूर करने का प्रयास करूंगी
सामाजिक बुराइयां दशानन के रूप में हमारे समाज में व्याप्त है. हम सभी को अपनी जिम्मेदारी व कर्तव्य को समझते हुए उसका मुकाबला करना चाहिए. हमने यह संकल्प लिया है कि हम समाज के अंदर व्याप्त ईर्ष्या, क्रोध, अहंकार, असीमित लालसा, हिंसक प्रवृति, असत्य की ओर झुकाव, द्वेष, अमानवीय प्रवृति को समाप्त करने के लिए अपनी जवाबदेही का निर्वाह करेंगे. हम अन्य महिलाओं को भी गरीबी, भूख, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, अस्वच्छता, जातिवाद, संप्रदायवाद व महिला प्रताड़ना जैसी बुराइयों से बचने के लिए प्रेरित करेंगे. सही मायने में दुर्गा पूजा का मतलब भी यही है. देवी पूजा सिर्फ अनुष्ठान नहीं है. यह हमें इस बात के लिए जागृत करता है कि जहां भी बुराई जैसा राक्षस देखो, उसे समाप्त करने के लिए त्रिशूल उठाओ. मां दुर्गा हमें अपनी शक्ति का अहसास कराती हैं. उनकी पूजा का मतलब समाज को समरस बनाने का प्रयास होना चाहिए.
डॉ संगीता शाही, अधिवक्ता
अन्याय के विरोध में जारी रहेगा संघर्ष
इस नवरात्र पर यह संकल्प लिया है कि अन्याय के पक्ष में कभी नहीं रहूंगी. चाहे वह सत्ता, समाज या परिवार ही क्यों न हो. हमेशा न्याय के लिए आवाज उठाऊंगी. ऐसा तभी संभव है जब हम मां दुर्गा की सही रूप से साधना करें. वैसे तो नौ दिनों तक मां के सभी रूपों की साधना की जाती है, लेकिन बिना संकल्प साधना का कोई मतलब नहीं है. शक्ति की उपासना का मतलब हमें अपने अंदर छिपी शक्ति को जगाना है. दुर्गा स्त्री अस्मिता का प्रतीक हैं. स्त्री में सृजन व संहार दोनों का गुण समाहित है. परिवार व समाज की बेहतरी के लिए हमें ऐसा करना होगा. स्त्री सब कुछ कर सकती है, बस उसे अपने अंदर की छिपी शक्ति का अहसास होना चाहिए. दुर्गा की उपासना का मतलब अपनी शक्ति पहचानना और उस पर अडिग रहना है. सभ्य व बेहतर समाज का दारोमदार स्त्री पर है. हम सभी नारियों को इसके लिए संकल्पित होना चाहिए.
डॉ रश्मिरेखा, साहित्यकार
सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की करूंगी सहायता
नवरात्र में हमें तमाम नकारात्मकता को सिरे से हटाते हुए सकारात्मकता की ओर कदम बढ़ाना चाहिए. नवरात्र अपने साथ स्वचछता और पवित्रता लेकर आता है. स्वाभाविक है कि अपने आरध्य की आराधना करते हुए हमेशा नेक रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए. अपनी शक्ति के अनुसार दूसरी की भलाई ही हमारा कर्तव्य होना चाहिए. इस नवरात्र को मैंने भी यही संकल्प लिया है. इसके अलावा हम सभी को आज की आसुरी शक्तियां अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, मजहबी विद्वेष को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए. मां का महागौरी रूप मुझे हमेशा से प्रिय रहा है. मां दुर्गा का जन्म ही कल्याण के लिए हुआ है. सृष्टि में जब अशांति थी, असुर तांडव कर रहे थे. उस वक्त ईश्वर के जप-तप-बल से त्रिपुर सुंदरी महागौरी सृष्टि के अधंकार को दूर कर प्रकाश फैलाते हुए इस रूप में अवतरित हुई थीं. यही रूप ममतामयी स्त्री का सुंदर रूप है.
डॉ भावना, लेखिका
समाज से घृणा रूपी राक्षस का खात्मा हो
मां दुर्गा के सौंदर्य भाव की छवि मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. इसमें वीरता के साथ भयनाश करने वाला शक्ति रूप पुरुषार्थ को बताता है. स्त्री होकर भी मां दुर्गा जिस रूप के जरिये लोगों को भयमुक्त रहने की प्रेरणा देती हैं, उस रूप की आराधना करना मुझे शुरू से पसंद है. नवरात्र में मैंने मां की पूजा की है. मैंने मां से यही मांगा है कि समाज में मद्य व घृणा रूपी राक्षस का खात्मा हो. मैंने यह संकल्प लिया है कि समाज को एक करने के लिए मां दुर्गा की तरह प्रयास करूंगी. जहां भी अधर्म देखूंगी. विरोध करूंगी. सामाजिक बुराइयों के खात्म के लिए संघर्ष करूंगी. आज समाज में बच्चियों व महिलाओं के साथ जाे कुछ हो रहा है, उसके लिए मां दुर्गा जैसा रूप लेना जरूरी है. महिलाएं अपने परिवार व समाज को एकसूत्र में पिराेने का संकल्प ले तो सभी तरह की बुराइयां समाप्त हो जायेंगी. हमारा समाज भी बेहतर होगा.
डॉ रंजना सरकार, कथक नृत्यांगना
नारी सशक्तीकरण के लिए काम करूंगी
मां दुर्गा राक्षसों का संहार कर हमें यह संदेश देती हैं कि जहां कहीं बुराई देखो, एेसे ही उसका खात्मा करो. मां दुर्गा की उपासना का मतलब आसुरी शक्तियों का खात्मा है. इसके लिए हमलोगों को सामूहिक रूप से प्रयास करना होगा. इस बार नवरात्र में मैंने यही संकल्प लिया है कि नारी सशक्तिकरण के लिए काम करूंगी. अपने आसपास की महिलाओं के बीच जाकर उनका आत्मविश्वास बढाऊंगी. मां दुर्गा के नौ रूपाें में नौ संदेश है. व्यक्ति इसको समझ ले व उसके अनुसार खुद को ढाल ले तो समाज से सारी बुराई समाप्त हो जाएगी. महिलाएं विशेष तौर पर मां दुर्गा की भक्ति से यह सीख ले कि हमें वैसा ही गुण धारण करना है. आज के समय में महिला सशक्तिकरण की बहुत जरूरत है. हम सभी इस गुण को धारण कर खुद को संकल्पित करें. बुराइयों से मुक्त समाज बनाने की पहल हमलोगों को ही करनी होगी.
डॉ शोभना चंद्रा, दंत रोग विशेषज्ञ
आत्मविश्वास जगा कर सबल बनाऊंगी
दुर्गा मां का महागौरी रूप की पूजा करना बहुत ही अच्छा लगता है. इस रूप में वे संसार के सभी रूपों को धारण कर लोगों को सुख, शांति, समृद्धि, जागरूकता, समानता व सामूहिकता के साथ पशुधन व पर्यावरण संरक्षण के लिए संदेश देती हैं. जो भी व्यक्ति इस मां के इस रूप की साधना करता है, उसके अंदर ये सभी गुण समाहित हो जाते हैं. दुर्गा पूजा हमें अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है. हमलोगों को यह संकल्प लेना चाहिए कि समाज में जितनी भी बुराइयां हैं, उससे बचे. हम किसी के लिए दुख का कारण नहीं बने. मां दुर्गा जिस तरह सभी का कल्याण करती हैं, उसी तरह हम भी अपने सामर्थ्य के अनुसार दूसरों का कल्याण करें. महिलाएं अपने अंदर मां की शक्तियां अनुभव करें व हर बुराई से निर्भीक होकर सामना करे. हमने इस पूजा में यही संकल्प लिया है कि नारियों को सबल बनाऊंगी, उनके आत्मविश्वास को मजबूत करूंगी.
वंदना शर्मा, समाजसेविका
जरूरतमंद लड़कियों की सहायता करूंगी
इस नवरात्रि में मैंने यह संकल्प लिया है कि जाति धर्म से ऊपर उठकर मुश्किल में फंसी लड़कियों की सहायता करूंगी. लड़कियों के आत्मविश्वास को मजबूत करूंगी. समाज में कहीं भी लड़कियों के साथ छेड़छाड़ होती है, उसके सम्मान को ठेस पहुंचती है तो उसका विरोध करूंगी. मां दुर्गा हमें यही संदेश देती हैं कि बुराइयों से लड़ो व उसके खात्मे के लिए जूझो. मां ने जिस तरह राक्षसों का वध किया था, उसी तरह हमें भी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करना होगा. माता के विभिन्न रूप हमें जागृत करते हैं. मेरे लिहाज से माता के स्कंदरूप की पूजा करने से छात्र-छात्राओं को अपने लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिलती है. इससे सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं, पर सिर्फ पूजा करने से ही सफलता नहीं मिलती. इसके लिए मेहनत भी करनी होगी. लड़कियां मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की सिर्फ आराधना ही नहीं करे, माता के गुणों को भी धारण करने की कोशिश करे
स्वर्णिम चौहान, महासचिव, बिहार विश्वविद्यालय छात्र संघ